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फास्ट-फूड दुकानों के पास रहना भी बच्चों में मोटापे का कारण

न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन की ओर से हाल ही में हुए एक नए अध्ययन के अनुसार फास्ट फूड और जंक फूड की दुकानों के पास रहने वाले बच्चों में अधिक वजन या मोटापे का खतरा ज्यादा होता है।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Nov 23, 2019

फास्ट-फूड दुकानों के पास रहना भी बच्चों में मोटापे का कारण

फास्ट-फूड दुकानों के पास रहना भी बच्चों में मोटापे का कारण

अकेले न्यूयॉर्क में ही विभिन्न स्कूलों में 10 लाख से ज्यादा बच्चे पढऩे जाते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चे फास्ट-फूड रेस्तरां के कितने करीब रहते हैं इसका असर भी उनके मोटे होने की आशंंका पर सीधा असर पड़ता है। ब्रायन एल्बेल की अगुवाई वाली शोध टीम ने पाया कि फास्ट-फूड आउटलेट के नजदीक रहने वाले 5 से 18 वर्ष के बीच के 20 फीसदी बच्चे मोटे थे और 38 फीसदी बच्चे सामान्य से अधिक वजन वाले थे। जबकि इन स्टोर और दुकानों से दूर रहने वाले बच्चों में मोटापे के आंकड़े घटते चले गए। एल्बेल ने कहा कि शोध के निष्कर्षों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर 'खाद्य पर्यावरण की संभावित भूमिका' का एक नया प्रभाव दिखाता है।

परस्पर तुलना कर जाना अंतर
संस्था वर्ष 2007 से न्यूयॉर्क के स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों की ऊंचाई और वजन पर नजऱ रख रही है। एल्बेल और उनकी टीम ने फास्ट-फूड और जंक फूड बेचने वाले आउटलेट्स, कॉर्नर स्टोर्स, सिट-डाउन रेस्तरां और किराने की दुकानों से दूरी के साथ छात्रों के पतों की तुलना करने के लिए मैपिंग सॉफ्टवेयर और शहर के रेस्तरां निरीक्षण डेटा का उपयोग किया। शोधकर्ताओं ने निरीक्षण डेटा का उपयोग पिज्जा, चीनी और किसी अन्य प्रकार के ऑर्डर व टेक अवे सेवा वाले रेस्तरां को भी जांचा। इसके आधार पर वे यह निष्कर्ष निकालने में सक्षम थे कि छात्रों के बॉडी, मास, इंडेक्स डेटा के अनुसार वे किस प्रकार के रेस्तरां के कितने करीब रहते थे। उन्होंने एक ही क्षेत्र के अलग-अलग छात्रों की परस्पर आपस में तुलना की।दरअसल बच्चों के घर, स्कूल या खेलने के पार्क के आस-पास ऐसे आउटलेट्स होने से यह उनकी पहुंच में होते हैं। वहीं आकर्षक विज्ञापन, होर्डिंग्स और ढेरों ऑफर के कारण भी इनका सेवन करने वाले बच्चों में मोटापा बढ़ता है। एक वजह ऑनलाइन ऑर्डर और टेक अवे की सुविधा भी है।

अध्ययन में पाया गया कि घर से किराना दुकानों और सिट-डाउन रेस्तरां की दूरी के आधार पर मोटापे के जोखिम में कोई वृद्धि नहीं हुई है। एल्बेल ने कहा कि युवाओं को जोखिम में डालने के लिए कितनी आसानी से और जल्दी से वे जंक फूड का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्कूल से आने-जाने के दौरान फास्ट-फूड आउटलेट से गुजरने पर क्या होता है इसका पता लगाने के लिए यह शोध किया गया था। शोध में सामने आया कि 1970 के दशक से बच्चों में मोटापे की दर तीन गुना हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दर में कमी लाकर हजारों बच्चों को मधुमेह, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।

इस महीने जारी बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, मिसिसिपी में 25.4 फीसदी की बचपन के मोटापे की दर के साथ 10 से 17 वर्ष की आयु के युवाओं में मोटापे की दर औसतन 15.3 फीसदी है। जबकि अश्वेत अमरीकी बच्चों और हिस्पैनिक युवाओं में क्रमश: 22.2 फीसदी और 19 फीसदी मोटापे की दर थी जो सफेद (11.8 फीसदी) या एशियाई (7.3 फीसदी) की तुलना में काफी अधिक थी। हालांकि रॉबर्ट वुड जॉनसन फाउंडेशन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में मोटापे की दर में कमी आई है।
साल 2010 के द हैल्दी हंगर फ्री किड्स एक्ट-2010 के लागू होने के बाद से अमरीका में प्रतिदिन 3 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक बच्चे स्वस्थ भोजन खा रहे हैं। इतना ही नहीं विशेष पूरक पोषण कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों में मोटापे की दर 2010 के 15.9 फीसदी से घटकर 13.9 फीसदी हो गई है।