12 जून 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लॉकडाउन में वर्किंग कपल्स के झगड़ों में आयी कमी, अधिकतर कामकाजी स्त्री-पुरुषों कहा अच्छा गुज़र रहा लॉकडाउन का वक़्त

-राजस्थान पत्रिका ने विभिन्न आयु वर्ग के लोगों से लॉकडाउन में घर पर रहने के दौरान उनके अनुभव को जानने के लिए सर्वे करवाया था

5 min read
Google source verification

जयपुर

image

Mohmad Imran

May 12, 2020

लॉकडाउन में वर्किंग कपल्स के झगड़ों में आयी कमी, अधिकतर कामकाजी स्त्री-पुरुषों कहा अच्छा गुज़र रहा लॉकडाउन का वक़्त

लॉकडाउन में वर्किंग कपल्स के झगड़ों में आयी कमी, अधिकतर कामकाजी स्त्री-पुरुषों कहा अच्छा गुज़र रहा लॉकडाउन का वक़्त

नोवेल कोरोना वायरस के चलते देश में बीते 49 दिनों से लॉकडाउन है। ऐसे में ज्यादातर कामकाजी स्त्री-पुरुष अपने घर से ही काम कर रहे हैं। संभवत: जीवन में पहली बार इतने लंबे समय के लिए घर से काम करने का अनुभव सभी के लिए एक नई चुनौती बनकर आया। कामकाजी पुरुषों को जहां ऑफिस के काम और घर के पारिवारिक माहौल के बीच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा वहीं कामकाजी महिलाओं के लिए भी यह दोहरी भूमिका नई चुनौतियां लेकर आई। काम और घर के उत्तरदायित्व के बीच ताल-मेल बिठाना उनके लिए भी आसान नहीं था। ऐसे में इन 'कामकाजी वॉरियर्स' ने कोरोना काल में इन परेशानियों से निपटने के लिए किन उपायों का सहारा लिया यह जानने के लिए राजस्थान पत्रिका ने विभिन्न आयु वर्ग के लोगों से लॉकडाउन में घर पर रहने के दौरान उनके अनुभव को जानने के लिए सर्वे करवाया। आइए जानते हैं सर्वे के प्रमुख निष्कर्षों के बारे में-

हर आयु वर्ग को छुआ
पत्रिका ने अपने सर्वे में 18 साल के किशोावय उम्र के युवाओं से लेकर 45 साल तक के कामकाजी लोगों से लॉकडाउन का उनके जीवन पर पडऩे वाले प्रभाव के बारे में जाना। सभी ने अपने नजरिए से लॉकडाउन के अच्छे-बुरे प्रभाव पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए।

आपसी झगड़ों में आई कमी
सर्वे में भाग लेने वाली 18 से 24 आयु वर्ग की महिलाओं ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान परिवार के सभी सदस्य बहुत हेल्पफुल और नम्रता से पेश आ रहे हैं। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर रूठना और राजनीतिक मुद््रदों पर बहस उन्हें पसंद नहीं आया। वहीं 25 से 34 आयु वर्ग की कामकाजी महिलाओं ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी जब लॉकडाउन के चलते थमी तो साथ बैठने पर पुराने झगड़े और मनमुटाव भी दूर हो गए। हालांकि छोटी-छोटी बातों पर पति या बच्चों का नाराज हो जाना और केवल अपनी ही चलाने से कलह भी होता है। 35 से 44 साल से अधिक उम्र की कामकाजी महिलाओं ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान पर उन पर दोहरी जिम्मेदारी और अतिरिक्त कामकाज करना पड़ रहा है। वे अब अपने परिवार पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं, काम पर जाने की जल्दबाजी में अब काम नहीं बिगड़ते। अपनी ड्यूटी के प्रति पहले से ज्यादा गंभीर हो गई हैं। वहीं बच्चों और पति का मोबाइल स्क्रीन टाइम बढऩा, जल्दी गुस्सा आ जाना, आलस, थकान और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की शिकायत भी की।

किफायत सिखा गया लॉकडाउन
इस बारे में जब पुरुषों से पूछा गया तो सर्वे में भाग लेने वाले 18 से 24 आयु वर्ग के युवाओं ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान घर-परिवार की समस्याओं पर चर्चा हुई जिससे कई मसले सुलझ गए। व्यवहार में पहले से ज्यादा विनम्रता आई है और कुछ ने कहा कि उनमें इस दौरान दिनचर्या को छोड़कर कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया। हां जल्दी गुस्सा आना और भाई-बहनों से झगड़े जरूर बढ़ गए। वहीं 25 से 34 साल के कामकाजी पुरुषों ने कहा कि उन्होंने लॉकडज्ञउन में खाना बनाना सीखा, परिवार की पहले से ज्यादा फिक्र करने लगे हैं और सीमित संसाधनों में जीवन बिताना सीख लिया है जो इस समय की सबसे बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इस आयु वर्ग के पुरुषों ने भी शॉर्ट टेम्पर्ड और समय पर खाने-पीने की आदत का बिगड़ जाने की शिकायत की। इसी क्रम में 35 से 44 साल तक के पुरुषों ने कहा कि वे लॉकडाउन में पैसों का सही वित्त प्रबंधन (मनी मैनेजमेंट) सीख सके और परिवार की परवाह भी और ज्यादा करने लगे हैं। हालांकि उन्होंने चिड़चिड़ेपन, ज्याइदा गुस्सा आना और बात-बात में बहस करने जैसे व्यवहार की शिकायत भी की।

ई लर्निंग बन गया शौक
45 साल से ज्यादा उम्र के कामकाजी स्त्री-पुरुषों ने कहा कि लॉकडाउन का सबसे ज्यादा फायदा उन्हें ही हुआ है। उन्हें इस समय में कम्प्यूटर friendly, ई-लर्निंग, ऑनलाइन स्टडी, सीमित संसाधनों में घर चलाना, फिजूलखर्ची से छुटकारा, कुछ मसलों पर समझौता कर झगड़ों और बहस को टालने का गुर आ गया। हालांकि इस आयु वर्ग के पुरुषों की कुछ शिकायतें भी बड़ी रोचक थीं। जैसे अधिकतर पुरुषों ने कहा कि उन्हें बिना नहाए नाश्ता नहीं मिलता था, जब कभी जीवन साथी से बहस हुई तो नाराजगी दूर करने के लिए उन्होंने पहल की, वहीं मोबाइल और टीवी पर ज्यादा समय बिताना भी उन्हें पसंद नहीं आया।

100 फीसदी पत्नियों को पति में नजर आईं नई खूबियां
-75.61 फीसदी पुरुषों की तुलना में 24.39 फीसदी महिलाओं ने ही सर्वेमें पूछे गए सवालों का जवाब दिया
-34 साल थी औसत आयु सर्वेमें भाग लेने वाले लोगों की
-44 फीसदी उत्तदाता प्राइवेट नौकरीपेशा थे, उनकी तुलना में 29.27 फीसदी सरकारी नौकरी, 25.20 फीसदी स्वरोजगार और करीब २ फीसदी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत थे
-29.27 फीसदी उत्त्रदाताओं ने ही लॉकडाउनमें घर रहने को बहुत अच्छा बताया, जबकि 36.59 फीसदी ने अच्छा और 30 फीसदी ने संतोषजनक बताया। 4.4 फीसदी ऐसे भी थे जिन्होंने लॉकडाउन को खराब अनुभव बताया
-66.67 फीसदी ने कहा कि लॉकडाउन में उनके बॉस का व्यवहार सामान्य रहा। जबकि 29.27 फीसदी ने कहा कि बॉस बहुत ज्यादा सहयोग कर रहे हैं वहीं केवल 3.25 फीसदी ने असहयोगात्मक व्यवहार की शिकायत की
-61 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि लॉकडाउन में उनका अपने सहयोगियों के साथ व्यवहार सामान्य रहा, जबकि लगभग 35 फीसदी लोगों ने कहा कि वे बहुत ज्यादा सहयोगात्मक रहे
-58.54 फीसदी ने कहा कि उन्होंने लॉकडाउन के समय ऑफिस कार्य को 4 घंटे ही दिए, 16.25 फीसदी ने 6 घंटे, करीब 23 फीसदी ने 8 घंटे और 2.44 फीसदी ने 12 घंटे से ज्यादा काम किया
-51.22 फीसदी ने लॉकडाउन के समय संसाधनों की कमी को सबसे बड़ी समस्या बताया। करीब 18 फीसदी ने सहकर्मियों से संपर्क, 13 फीसदी ने सहकर्मियो ंसे समन्वय की समस्या को भी प्रमुखता से गिनाया। करीब 18 फीसदी ऐसे भी जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान तकनीकी समस्याओं को ज्यादा बड़ी परेशानी बताया
-52 फीसदी ने कहा कि घर से काम करना ऑफिस का विकल्प नहीं बन सकता जबकि लगभग 48 फीसदी ने कहा कि ऐसा संभव हो सकता है
-100 फीसदी महिलाओं को अपने पति में दो नई विशेषताएं देखने को मिली जबकि 96.75 फीसदी पुरुषों ने भी अपने जीवन साथी में दो नई खूबियां पाईं
-99.19 फीसदी पत्नियों ने अपने पति में कम से कम दो कमियां भी पाईं वहीं 92.68 फीसदी पतियों ने भी ऐसा ही पाया