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Mammography Screening: 40 की उम्र के बाद कब करवानी चाहिए मैमोग्राफी? नई गाइडलाइन ने दूर किया महिलाओं का कन्फ्यूजन

Breast Cancer Screening: 40 की उम्र के बाद मैमोग्राफी कब और कितनी बार करवानी चाहिए? नई मेडिकल गाइडलाइन और रिसर्च के आधार पर जानिए ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग से जुड़ी जरूरी बातें।
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भारत

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Dimple Yadav

•

Updated: 4 Jun 2026, 3:27 PM IST

Breast Cancer Screening Mammography Age Breast Cancer Detection

मैमोग्राफी की प्रतीकात्मक छवि (photo- freepik)

Breast Cancer Screening: ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है। अच्छी बात यह है कि अगर इसकी पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मैमोग्राफी (Mammography) कब से शुरू करानी चाहिए और कितनी बार करानी चाहिए? इसी को लेकर हाल ही में नई मेडिकल गाइडलाइंस और रिसर्च ने चर्चा तेज कर दी है।

अप्रैल 2026 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियंस (ACP) ने ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग को लेकर नई गाइडेंस जारी की। वहीं, कोक्रेन डेटाबेस ऑफ सिस्टमैटिक रिव्यूज में प्रकाशित एक रिसर्च रिव्यू में यह भी सामने आया कि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रखने वाली महिलाओं में जोखिम का आकलन करने वाले मौजूदा टूल्स हमेशा सटीक नहीं होते।

40 की उम्र के बाद क्यों बढ़ जाता है महत्व?

औसत जोखिम (Average Risk) वाली महिलाओं को 40 साल की उम्र के बाद नियमित स्क्रीनिंग पर विचार करना चाहिए। कई कैंसर संगठनों का मानना है कि इस उम्र में मैमोग्राफी शुरू करने से कैंसर को शुरुआती चरण में पकड़ने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि अलग-अलग मेडिकल संस्थाओं की राय थोड़ी अलग है। कुछ संगठन हर साल मैमोग्राफी कराने की सलाह देते हैं, जबकि कुछ दो साल में एक बार जांच कराने को पर्याप्त मानते हैं। यही वजह है कि कई महिलाओं में इसको लेकर भ्रम बना रहता है।

क्या मैमोग्राफी ही सबसे अच्छा टेस्ट है?

आज भी ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए मैमोग्राफी सबसे भरोसेमंद जांच मानी जाती है। हालांकि, घने (Dense) ब्रेस्ट टिश्यू वाली महिलाओं में कभी-कभी कैंसर की गांठ मैमोग्राम में साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, MRI या अन्य इमेजिंग टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ये टेस्ट मैमोग्राफी की जगह नहीं लेते, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके साथ किए जाते हैं।

क्या हर संदिग्ध रिपोर्ट कैंसर होती है?

कई महिलाएं इस डर से जांच नहीं करवातीं कि कहीं रिपोर्ट में कुछ गलत न निकल आए। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, मैमोग्राम में कोई असामान्यता दिखने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। आंकड़े बताते हैं कि स्क्रीनिंग के बाद कई महिलाओं को अतिरिक्त जांच के लिए बुलाया जाता है, लेकिन उनमें से बहुत कम मामलों में वास्तव में कैंसर की पुष्टि होती है। इसलिए किसी संदिग्ध रिपोर्ट को देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार आगे की जांच करानी चाहिए।

किन महिलाओं को पहले स्क्रीनिंग की जरूरत पड़ सकती है?

अगर परिवार में मां, बहन या बेटी को कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, या BRCA जैसे जेनेटिक म्यूटेशन मौजूद हैं, तो डॉक्टर सामान्य उम्र से पहले स्क्रीनिंग शुरू करने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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