
भोजन की प्रतीकात्मक छवि (photo- freepik)
WHO Food Safety Report: क्या आपने कभी सोचा है कि घर का खाना भी कभी-कभी बीमारी की वजह बन सकता है? अक्सर हम मान लेते हैं कि फूड पॉइजनिंग का मतलब सिर्फ एक-दो दिन पेट खराब होना है। लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट बताती है कि असुरक्षित या दूषित खाना हर साल करोड़ों लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है, और सबसे ज्यादा मार छोटे बच्चों पर पड़ रही है।
चिंता की बात यह है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चे दुनिया की आबादी का छोटा-सा हिस्सा हैं, लेकिन खाने से होने वाली बीमारियों का बड़ा बोझ इन्हीं पर पड़ता है। उनकी इम्युनिटी अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए खराब खाना उनके शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
WHO की नई रिपोर्ट बताती है कि असुरक्षित भोजन की वजह से हर साल करीब 86.6 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं, जबकि लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों की होती है। खराब भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी (Parasites) डायरिया, पेट के संक्रमण और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। छोटे बच्चों में ये संक्रमण कई बार जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि खतरा सिर्फ बैक्टीरिया या वायरस से नहीं है। कई बार खाना ऐसे जहरीले तत्वों से भी दूषित हो सकता है जिन्हें हम देख नहीं सकते। सीसा (Lead), आर्सेनिक (Arsenic) और मिथाइल मरकरी (Methylmercury) जैसे तत्व धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में इनका असर और भी ज्यादा हो सकता है। इससे दिमाग के विकास, सीखने की क्षमता और याददाश्त पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है।
दुनिया के कई हिस्सों में आज भी साफ पानी, स्वच्छता और सुरक्षित भोजन की सुविधा सभी तक नहीं पहुंच पाई है। यही वजह है कि अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में खाने से होने वाली बीमारियां ज्यादा देखने को मिलती हैं।
बीमार पड़ने का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता। काम से छुट्टी, इलाज का खर्च और उत्पादकता में कमी का असर परिवार और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ता है। WHO के मुताबिक, 2021 में ऐसी बीमारियों की वजह से दुनिया को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
04 Jun 2026 02:34 pm
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