
हर बायोप्सी का मतलब कैंसर नहीं होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
What Is A Biopsy Hindi: जब भी डॉक्टर किसी मरीज को बायोप्सी (Biopsy) करवाने की सलाह देते हैं, तो सबसे पहला ख्याल दिमाग में यही आता हैकहीं मुझे कैंसर तो नहीं हो गया? यह शब्द सुनते ही पसीने छूट जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बायोप्सी का मतलब कैंसर नहीं होता? आइए मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) और क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, समझते हैं कि आखिर बायोप्सी क्या है, यह कब की जाती है और इससे डरने की जरूरत क्यों नहीं है।
बायोप्सी एक ऐसी मेडिकल जांच है जिसमें डॉक्टर आपके शरीर के सेल्स (कोशिकाओं) या टिशू (ऊतकों) का एक छोटा सा सैंपल लेते हैं। इसके बाद इस सैंपल को लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे बारीकी से जांचा जाता है ताकि यह पता चल सके कि वहां कोई बीमारी पनप रही है या नहीं। जब सीटी स्कैन, एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट यह नहीं बता पाते कि शरीर के अंदर की गांठ या बदलाव किस वजह से है, तब डॉक्टर सटीक बीमारी पकड़ने के लिए बायोप्सी का सहारा लेते हैं।
बायोप्सी कई तरीकों से की जाती है, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि सैंपल शरीर के किस हिस्से से लेना है;
1. सुई से की जाने वाली जांच (Needle Biopsy)- यह सबसे आम तरीका है। इसमें एक पतली या थोड़ी मोटी सुई की मदद से डॉक्टर त्वचा के रास्ते अंदरूनी गांठ या टिशू का सैंपल निकाल लेते हैं। जैसे ब्रेस्ट या थायराइड की बायोप्सी।
2. एंडोस्कोपिक बायोप्सी (Endoscopic Biopsy)- इसमें एक पतली, लचीली ट्यूब जिसके आगे कैमरा लगा होता है (एंडोस्कोप), उसे मुंह या अन्य रास्ते से शरीर के अंदर डाला जाता है। डॉक्टर स्क्रीन पर देखते हुए प्रभावित जगह से छोटा सा टुकड़ा निकाल लेते हैं।
3. त्वचा की बायोप्सी (Skin Biopsy)- अगर त्वचा पर कोई संदिग्ध रैश, तिल या मस्सा बदल रहा हो, तो डॉक्टर उस हिस्से को हल्का सा खुरचकर या काटकर सैंपल लेते हैं।
4. सर्जिकल बायोप्सी (Surgical Biopsy)- जब प्रभावित हिस्सा शरीर के काफी अंदर हो और सुई से सैंपल लेना मुमकिन न हो, तब एक छोटी सी सर्जरी करके उस हिस्से को या पूरी गांठ को बाहर निकाला जाता है।
यह इस जांच से जुड़ा सबसे बड़ा डर है। लेकिन सच यह है कि बायोप्सी के दौरान मरीजों को दर्द का अहसास न के बराबर या बहुत कम होता है। छोटी बायोप्सी के लिए डॉक्टर उस हिस्से को लोकल एनेस्थीसिया (सून करने की दवा) देकर सुन्न कर देते हैं। वहीं अगर बड़ी या अंदरूनी हिस्से की बायोप्सी (जैसे सर्जिकल बायोप्सी) होनी हो, तो मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर बेहोश या गहरी नींद में सुला दिया जाता है, जिससे दर्द का पता ही नहीं चलता।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
20 Jul 2026 12:06 pm
Published on:
20 Jul 2026 12:06 pm
