
दर्द में बर्फ लगाएं या गर्म पानी से सिकाई करें- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Gemini)
Cold Compress VS Warm Compress: जब भी हमें शरीर में कहीं दर्द होता है, तो घर के लोग तुरंत सलाह देते हैं थोड़ी सिकाई कर लो! लेकिन उलझन तब शुरू होती है जब कोई कहता है कि बर्फ (Cold Compress) लगाओ और कोई कहता है कि गर्म पानी की थैली (Warm Compress) से सिकाई करो। गलत सिकाई करने से आपका दर्द घटने के बजाय बढ़ भी सकता है। जोहन्स हॉपकिन्स मेडिसिन (Johns Hopkins Medicine) के अनुसार, दर्द में बर्फ लगानी है या गर्म सिकाई, यह इस बात पर निर्भर करता है कि दर्द किस तरह का है और कब शुरू हुआ है। आइए समझते हैं कि किस स्थिति में क्या करना आपके लिए सबसे सही रहेगा।
चोट लगने के तुरंत बाद (शुरुआती 24 से 48 घंटों के भीतर)। जब आपको कोई नई चोट लगती है जैसे पैर मुड़ जाना, मोच आना या कोई अंग सूज जाना तो उस हिस्से में खून का बहाव अचानक बढ़ जाता है। बर्फ लगाने से वहां की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे खून का दौरा धीमा हो जाता है। इससे सूजन कम होती है और वह हिस्सा थोड़ा सुन्न हो जाता है, जिससे दर्द का अहसास तुरंत कम हो जाता है।
पुराना दर्द (जो हफ्तों या महीनों से हो) और मांसपेशियों की जकड़न में। वेबएमडी के अनुसार, गर्मी हमारे शरीर में खून के बहाव को बढ़ाती है। जब मांसपेशियों में खिंचाव या जकड़न होती है, तो गर्म सिकाई करने से वहां ऑक्सीजन और पोषक तत्व तेजी से पहुंचते हैं। इससे थकी और कड़क हो चुकी मांसपेशियां रिलैक्स (ढीली) हो जाती हैं और दर्द में आराम मिलता है।
1. नई चोट और सूजन = बर्फ (Ice): अगर चोट ताजी है, हिस्सा लाल है या सूज गया है, तो सिर्फ बर्फ लगाएं।
2. पुरानी जकड़न और दर्द = गर्मी (Heat): अगर दर्द पुराना है, मांसपेशियां कड़क हो गई हैं या हिलने-डुलने में दिक्कत हो रही है, तो गर्म सिकाई करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
20 Jul 2026, 12:05 PM IST
Published on:
20 Jul 2026, 12:05 PM IST
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