मास्क सेफ्टी: शोध बताते हैं कि मास्क में उपयोग कुछ फैब्रिक सुरक्षा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए फेस मास्क को अनिवार्य सुरक्षा उपकरण माना है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो मास्क आप पहनते हैं उसका मटीरियल वासतव में संक्रमण को रोकने में कितना कारगर है? क्या कोई भी मास्क लगाने से वायरस का खतरा टल जाता है?

By: Mohmad Imran

Published: 24 Aug 2020, 04:36 PM IST

नाक, कान, आंख और मुंह के जरिए कोरोना वायरस (CORONA VIRUS COVID-19) हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WORLD HEALTH ORGANISATION) ने फेस मास्क (FACE MASK) पहनना अनिवार्य कर दिया है। लेकिन अब भी इस बात पर बहस जारी है किे किस तरह के मैटीरियल से बना मास्क संक्रमण को पूरी तरह रोकने में सक्षम है। अब इन सवालों के जवाब देते हुए हाल ही ड्यूक विश्वविद्यालय (DUKE UNIVERSITY) के वैज्ञानिकों ने सामान्य वार्तालाप के दौरान ड्रॉपलेट्स (DROPLETS) की बूंदों को चेहरे और मुंह तक पहुंचने से रोकने में विभिन्न फेस मास्क और उसमें उपयोग होने वाले कपड़े और डिजाइनों की प्रभावकारिता का परीक्षण किया है। शोध में कुछ वैकल्पिक फेस मास्क विकल्पों के बारे में बताया गया है जो न केवल सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि कुछ मास्क तो इन्हें न पहनने से भी अधिक हानिकारक हो सकते हैं। आज फेस मास्क दुनिया के कई हिस्सों में एक अनिवार्य सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकता बन गया है क्योंकि कोविड-19 महामारी से अब तक 2.36 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। सर्जिकल मास्क और एन-95 की कम आपूर्ति के कारण लोगों को यह सुझाव दिया गया है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर निकलने पर सर्जिकल या एन-95 मास्क का उपयोग करने की बजाय कपड़े के बने मास्क, गमछे और रुमाल का इस्तेमाल भी कारगर है।

मास्क सेफ्टी: शोध बताते हैं कि मास्क में उपयोग कुछ फैब्रिक सुरक्षा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं

ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया परीक्षण
हमारे द्वारा पहने जाने वाले सभी फेस मास्क क्या वाकई हमारी सुरक्षा करते हैं जितना कि हमें उन पर विश्वास होता है? इसी बात का पता लगाने के लिए ड्यूक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सामान्य बातचीत के दौरान निकलने वाले ड्रॉपलेट्स के प्रसार को कम करने में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न फेस मास्क, उनमें लगे फैब्रिक और डिजाइनों की प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए एक विशेष डिज़ाइन की गई सरल तकनीक विकसित की है। शोध में कुछ वैकल्पिक फेस मास्क विकल्पों के बारे में बताया गया है जिनमें से कुछ न केवल हमें बहुत थोड़ी सुरीक्षा प्रदान करते हैं बल्कि ज्यादा देर तक उन्हेंचेहरे पर लगाए रखने से वे हमें अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी दे सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि आदर्श रूप से किसी भी होममेड फेस मास्क में दो से तीन परतें होनी चाहिए, लेकिन अगर ऐसा संभव न हो तो दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारियों कासुझाव है कि ऐसी सूरत में किसी भी फेस मास्क की तुलना में स्कार्फ, बैंडाना या गर्दन तक कवर किएजाने वाले मास्क पहननाज्यादा बेहतर है। बिना जाने किसी भी प्रकार के फैब्रिक या डिजायन का मासक पहनना safety से ज्यादा हानि पहुंचा सकता है।

मास्क सेफ्टी: शोध बताते हैं कि मास्क में उपयोग कुछ फैब्रिक सुरक्षा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं

क्या कहता है शोध फेस मास्क के बारे में
इस नए अध्ययन की शुरुआत तब हुई जब ड्यूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एरिक वेस्टमैन यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि स्वस्थ्य लोगों को संक्रमित या संदिग्ध अथवा लक्षणों का प्रदर्शन न करने वाले संक्रमित लोगों को किस प्रकार के मास्क का उपयोग करना चाहिए ताकि संक्रमण का प्रसार रोका जा सके। एरिक ने महसूस किया कि बाजार फेस मास्क के बारे में ऐसे हजारों असाधारण दावों से भरा पड़ा है जो हमें कोविड-19 से बचाने का दम भरते हैं। लेकिन इन मास्क की प्रभावकारिता को सत्यापित करने के लिए कोई कसौटी अभी तक नहीं बनी थी। एरिक कहते हैं कि हम यह जानना चाहते थे कि किस प्रकार के चेहरे वाले व्यक्ति को कौन-सा डिजायन या फैब्रिक सूट करेगा। लेकिन इस बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी। एरिक ने अपने सहयोगी मार्टिन फिशर की मदद से ड्यूक की एडवांस्ड लाइट इमेजिंग एंड स्पेक्ट्रोस्कोपी मशीन का उपयोग कर शोधकर्ताओं ने यह परीक्षण करने के लिए एक सस्ती और सरल प्रणाली विकसित की।

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बोलने से भी निकलते ड्रॉपलेट्स
एरिक और फिशर ने अपने शोध में पाया कि केवल संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने पर ही नहीं बल्कि उसके बहुत नदजीकी रहते हुए बातचीत करने के दौरान निकलने वाले महीन ड्रॉपलेट्स भी हजारों वायरस का स्रोत बनकर आपको संक्रमित कर सकते हैं। शोध में कुछ मास्क ने बहुत उम्दा प्रदर्शन किया तो कुछ ने तमाम दावों के बावजूद सुरचा में चूक को उजागर किया। अप्रत्याशित रूप से एक एन-95 मास्क छोटी बूंदों को बाहर आने से रोकने में सर्जिकल मासक की तुलना में कमजोर साबित हुआ। हालांकि, घर पर बने कॉटन के सामान्य मास्क ने शानदार प्रदर्शन किया और सर्जिकल मास्क की तुलना में ज्यादा महीन ड्रॉपलेट्स को भी रोकने में सफल रहा।

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शोध में यह भी सामने आया कि सभी फेशियल कवरिंग मासक ड्रॉपलेट्स को रोकने या कम करने में प्रभावी नहीं थे। बुने हुए या बैंडाना काफी कमजोर साबित हुए। लेकिन गर्दन में पहना जाने वाला गेटर मास्क ने वास्तव में शोधकर्ताओं को आश्चर्यचकित कर दिया।एरिक ने बताया कि गेटर मास्क दरअसल ड्रॉपलेट्स के बड़े कणों को कई छोटे कणों में तोड़ देते हैं। शोध का निष्कर्ष है कि इस तरह का मास्क पहनना अंतत: काफी सुरक्षित है क्योंकि बिना मास्क पहने वायरस के संचरण का अधिक जोखिम होता है। यह नया अध्ययन जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ था।

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