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सेहत के लिए ‘हंसी’ का डोज़ दे रहे ‘मेडीकल जोकर’

डॉक्टरी का पेशा बहुत जिम्मेदारी भरा काम है। लेकिन रोगियां की लगातार बढ़ती संख्या के लिए अब अस्पताल प्रबंधन केवल दवाओं और उपकरण ही पर निर्भर नहीं है। बल्कि वे अपने रोगियों को जल्द से जल्द अच्छा करने के लिए अब बीमारी के लिए प्राकृतिक औषधि 'हंसी' का भी उपयोग कर रहे हैं।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Mar 02, 2020

सेहतमंद बना रहे 'मेडिकल जोकर'

सेहतमंद बना रहे 'मेडिकल जोकर'

कर्मचारी ही जोकर
मेडिकल क्लाउंस के लिए बाहर के नहीं बल्कि अस्पताल के ही देखभाल करने वाले कर्मचारी जोकर के कपड़े पहनकर रोगियों को हंसाने का काम करते हैं। इससे अस्पताल के वार्ड में मरीज के साथ चिकित्सकों का तनाव भी कम होता है।

परंपरागत तरीका
आज बढ़ते तनाव क्षेत्र को दूर करने के लिए कर्मचारी का जोकर की सदियों पुरानी परंपरागत शैली का ही उपयोग करते हैं। यह तरीका प्राचीन समय से बहुत सी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में उपचार का काम करता है।

दवा से बेहतर हंसी
चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार जोकरों की हरकतों से उपजा सहज हास्य कुछ रोगों में दवाओं से भी बेहतर है। 2008 में शोधकर्ताओं ने इजरायल के अस्पताल में एनेस्थीसिया और सर्जरी वाले बच्चों के लिए ऐसे ही जोकर नियुक्त किए थे ताकी उनका तनाव कम किया जा सके।

घट गया चिंता का स्तर
20 से 30 मिनट तक मेडिकल मसखरे से मिलने के बाद उन बच्चों में चिंता का स्तर नियंत्रण में था जिन्हें बाद में एनेस्थीसिया दिया गया था। अन्य अध्ययनों से पता चला है कि ऑटिज्म विकार वाले बच्चों के लिए भी मसखरे फायदेमंद हैं। ऐसे ही मनोभ्रंश और गंभीर बीमारी वाले वयस्क भी मनोवैज्ञानिक रूप से अच्छे परिणाम दिखाते हैं।

1970 से चलन में
इस विधा का सबसे पहले उपयोग प्रसिद्ध डॉ. हंटर 'पैच' एडम्स ने 1970 में किया जो स्वास्थ्य देखभाल माहिर जोकर रहे हैं। उन पर 1998 में एक फिल्म भी बन चुकी है। यह प्रतिभा रोगी व डॉ. के बीच विश्वास और जुड़ाव बनाने में मदद करती है।