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मेडिकल कर्मचारी आवासों को तोड़कर बनेगा मल्टी स्टोरी आधुनिक आवास

मेडिकल कर्मचारी आवासों को तोड़कर बनेगा मल्टी स्टोरी आधुनिक आवास

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medical staff residences.

medical staff residences.

जबलपुर . मेडिकल में दो समस्याओं के एक हल पर दो साल से काम अटका हुआ है। इससे जहां विकास के काम रुके हुए हैं। वहीं कर्मचारी भी लचर व्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। दरअसल अस्पताल को विस्तार के लिए भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए कई एकड़ों में फैले कर्मचारी आवासों को तोड़कर मल्टी स्टोरी आधुनिक आवास बनाने का प्रस्ताव है। इससे कर्मचारियों को भी सुविधापूर्ण आवास मिलेंगे, वहीं खाली भूमि पर विस्तार का काम हो सकेगा। योजना पर मप्र हाउसिंग बोर्ड का काम करना है, पर अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण मामला दो साल से फाइलों में अटका है।

मेडिकल अस्पताल का रीडेंसीफिकेशन अटका
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आवास जर्जर
मेडिकल में बने मल्टी स्टोरी कर्मचारी आवास तो विकास को मिले जमीन
जर्जर आवासों से मुक्ति

जर्जर हुए क्वार्टर
बड्डा दादा मैदान के समीप से लेकर पुरवा-धनवंतरि नगर मार्ग के किनारे स्थित मेडिकल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के क्वॉर्टर पांच दशक पुराने हैं जो जर्जर हो चुके हैं। प्राथमिक आंकलन के अनुसार ये क्वॉर्टर पंद्रह एकड़ के लगभग जमीन पर स्थित हैं। रीडेंसीफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत इन क्वॉर्टर के स्थान पर कर्मचारियों के लिए मल्टी स्टोरी आवासीय भवनों का निर्माण होने पर बड़ा भूखंड खाली हो सकेगा। इसका उपयोग मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के विस्तार के लिए किया जा सकता है।

भूमि की कमी से विस्तार अटका
सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का विस्तार होना है। नई ब्रांच शुरू करने के लिए भी नए भवन की दरकार है। मेडिकल अस्पताल भी बोन बैंक, बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट समेत अन्य ब्रांच शुरू करने की दिशा में प्रयासरत है। इसके लिए भवन चाहिए। मेडिकल कॉलेज में यूजी और पीजी की सीट भी बढ़ी हैं, ऐसे में मेडिकल छात्रों के लिए नए हॉस्टल भवन भी चाहिए।

बंट गई मेडिकल की जमीन
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास स्थापना के समय सौ एकड़ के लगभग जमीन थी। आसपास के रहवासियों, किसानों ने भी अस्पताल की स्थापना के लिए अपनी जमीनों का दान किया था। 1970 के दशक में जबलपुर में आईसीएमआर की स्थापना का प्रस्ताव तैयार हुआ तो मेडिकल कॉलेज ने जमीन उपलब्ध कराई। इसके बाद मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना को स्वीकृति के लिए 50 एकड़ से ज्यादा जमीन की आवश्यकता थी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज ने एमयू को जमीन उपलब्ध कराई। इसके कारण मेडिकल कॉलेज की जमीन कम हो गई।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार रीडेंसीफिकेशन प्रोजेक्ट पर काम होना है, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वर्षों पुराने जो र्क्वाटर क्षतिग्रस्त हो गए हैं उनके स्थान पर मल्टी स्टोरी भवन बनाए जाने हैं, जिससे उनके रहने की उपयुक्त व्यवस्था हो जाए और खाली होने वाली जमीन कॉलेज व अस्पताल अन्य कार्यों के लिए उपयोग कर सकें। फिलहाल प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार नहीं हो सकी है।

एलके बाटले, डिप्टी कमिश्नर एमपी हाउसिंग बोर्ड