तेज़ी से बिगड़ रही है हमारी सेहत, मधुमेह रोगियों में भारत दूसरे स्थान पर

53 फीसदी भारतीय मानते हैं कि वे फिटनेस के मामले में आलसी प्रवृत्ति के हैं

By: Mohmad Imran

Published: 05 Feb 2021, 12:56 PM IST

कोविड-19 महामारी ने हमें अहसास कराया है कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। परिस्थितियां कैसी भी हों, फिट और स्वस्थ बने रहना अब हर किसी की प्राथमिकता बन चुकी है। लेकिन दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा कोविड प्रभावित देश होने के बावजूद भारत में लोग स्वास्थ्य को लेकर अब भी लापरवाह बने हुए हैं। फिटनेस डिस्कवरी प्लेटफॉर्म द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे में 53 फीसदी प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि फिट रहने के लिए जिस अनुशासन और समर्पण की जरुरत है वह उनमें नहीं है। इतना ही नहीं सप्ताह में तीन से ज्यादा बार वे जिम या हाई-इंटेसिटी एक्टिविटीज से जी चुराते हैं, जिम या योगा नहीं करते हैं।

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60 फीसदी नहीं करवाते ब्लड प्रेशर की जांच
सर्वे के अनुसार अधिकांश भारतीय अपने मूल स्वास्थ्य प्रोफाइल पर ध्यान नहीं देते हैं। सर्वे में 60.4 फीसदी उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने कभी अपने रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की जांच नहीं करवाई। स्वास्थ्य के प्रति ऐसी उदासीनता आर्थिक स्तर पर भी चोट पहुंचा रहा है। बीते 10 सालों में सामान्य भारतीय की जीवन प्रत्याशा 85-90 की आयु से घटकर आज 70-75 पर आ गई है। नतीजा, आज युवाओं में भी दिल के दौरे और अन्य गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं जो कुछ सालों पहले तक वृद्धों की बीमारी मानी जाती थी। 40 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट की वजह से लोगों की जान जाने की घटनाएं चिंता का विषय है।

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67 फीसदी चलने को पर्याप्त मानते हैं?
समय की कमी के चलते बहुत से लोग पार्क में व्यायाम करना पसंद तो करते हैं लेकिन सर्वे के मुताबिक इनमें से 67 फीसदी भारतीय तेज शारीरिक गतिविधियों जैसे ब्रिस्क वॉकिंग को ही स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त मानते हैं। जबकि 26 फीसदी भारतीय ही डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित योग-पिलेट्स को कवर करने वाली शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा सिर्फ 11 फीसदी कार्डियो और टीम स्पोर्ट्स जैसी हाई-इंटेसिटी एक्टिविटीज में भाग लेते हें जबकि मात्र 10 फीसदी वेट ट्रेनिंग करते हैं। स्रोटा वेलनेस सेंटर के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रवीश गौड़ का कहना है कि यह स्थिति तो तब है जब देश में इलाज पर खर्च किए जाने वाली धनराशि का 26 प्रतिशत खर्च अकेले हृदय संबंधी विकारों पर होता है।

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2025 तक दोगुने होंगे मधुमेह रोगी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट की मानें तो 'स्वस्थ भारत' की तस्वीर वाकई डरावनी है। वर्ल्ड हैप्पिनेस इंडेक्स में भारत सबसे उदास देशों ममें शामिल है। सूची में भारत पड़ोसी देश चीन और अमरीका से भी निचले पायदान पर है। चीन के बाद, भारत 7.7 करोड़ मधुमेह रोगियों के साथ तेजी से दुनिया का डाबिटीज हब या मधुमेह रोगियों का घर बनता जा रहा है। देश में मधुमेह रोगियों की वर्तमान संख्या 2025 के अंत तक दोगुनी हो जाएगी। ऐसे में खुद को स्वस्थ रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। ऐसा करके आप न केवल स्वस्थ रहेंगे बल्कि जीवनशैली की गुणवत्ता बढऩे के साथ ही दीर्घायु भी होंगे।

Mohmad Imran
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