
मेडिकल इन्वेंशन: यह तकनीक बचाएगी हेल्मट पहनने वाले खिलाडिय़ों को कोरोना वायरस से
अमरीका स्थित लूइजि़याना स्टेट यूनिवर्सिटी (Louisiana State University) के वैज्ञानिकों ने एक लुइजियाना स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के साथ साझेदारी में कोरोना वायरस (Corona Virus) से खिलाडिय़ों की सुरक्षा में मदद करने के लिए एक नई तकनीकी ईजाद की है। उन्होंने खिलाडिय़ों द्वारा पहने जाने वाले एथलेटिक हेल्मेट (Athletic Hekmets) के लिए खास अनुकूलन योग्य एयर सर्कुलेशन डिवाइस (Air Circulation Device) बनाया है जिसमें लगे पंखे खिलाडिय़ों के हेल्मेट को अंदर से ठंडा रखने में मदद करेगा। इस नए उपकरण का फिलहाल एलएसयू खिलाडिय़ों अभी परीक्षण कर रहे हैं। इस तकनीक से उन्हें मैदान पर खेलते समय सिर को ठंडा रखने में मदद मिलेगी। इससे वे अपने हेलमेट और अतिरिक्त कोविड-19 से सेफ्टी गियर्स (AAdditional Safety Gears for Covid-19) को को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी। फिलहाल लूइजि़याना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस नई 'हेल्मेट कूलिंग और सर्कुलेशन' (Helm,et Cooling and Circulation) तकनीक का पेटेंट करवाया है। यह तकनीक इसलिए भी कारगर है क्योंकि इसे सिर्फ खिलाडिय़ों के हेल्मेट के साथ ही नहीं बल्कि बाजार में उपलब्ध किसी भी ब्रांड के हेल्मेट के साथ उपयोग किया जा सकता है।
हैल्मेट की खासियतें जो हैं बिल्कुल अलग
इस 'हेल्मेट कूलिंग और सर्कुलेशन' तकनीक का सबसे उपयोगी पहलू यह है कि इसका उपयोग अन्य सुरक्षात्मक गियर जैसे कि वाइजर्स (फेस शील्ड) लेंस और फेस गार्ड के साथ भी किया जा सकता है। हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य मैदान पर खेलते समय कोविड-19 वायरस से खिलाडिय़ों को सुरक्षित रखना है। दरअसल ऐसे सेफ्टी गियर्स को पहनकर खेलने से फेस शील्ड पर सांस लेने-छोडऩे के दौरान धुंध सी छा जाती है जिससे खिलाडिय़ों को देखने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं खेलते समय शरीर और सिर के तापमान अगर कम न हो तो इससे शरीर के समग्र तापमान में वृद्धि हो सकती है, जो संभावित रूप से थकान और खतरनाक स्वास्थ्य स्थितियों जैसे हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है।
कोरोना ने बदले सेफ्टी गियर्स के तरीके
दरअसल कोरोना वायरस के कारण मैदान पर खिलाडिय़ों को सुरक्षित रखने वाले सुरक्षा उपकरणों में भी बदलाव आए हैं। फुटबॉल के मैदान पर अब खिलाड़ी एक-दूसरे के चेहरे के करीब सांस लेने से रोकने और नाक, मुंह से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स से बचने के लिए फुल-फेस प्लास्टिक उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं। लेकिन एलएसयू की यह तकनीक फुटबॉल जैसे करीबी संपर्क खेलों के लिए मानक सुरक्षात्मक गियर बन सकते हैं। तकनीक हेल्मेट में हवा के आने-जाने (Airflow) को आसान बनाती है। हेलमेट आमतौर पर सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किए जाते हैंए न कि आराम के लिए। इसलिए हेल्मेट में अत्यधिक गर्मी और नमी का निर्माण एक आम समस्या है।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक
यह नई तकनीक हेल्मेट के अंदर तापमान को ठंडा करने के लिए हेलमेट के पीछे मौजूद हवा को बैट्री से चलने वाले एक सेट से जुड़ी लचीली टयूब और उसमें फिट पंखों की मदद से हेलमेट के अंदर हवा चूसती है। इन ट्यूब्स को बड़ी आसानी से अपनी जरुरत के हिसाब से चेहरे के ऊपर सिर के पीछे सेट किया जा सकता है। कोरोना वायरस से अधिक सुरक्षा के लिए एन 95 फिल्टर मास्क (N95 Filetr Mask Materials) की सामग्री को भी इसमें एयरफिल्टर के रूप में जोड़ा जा सकता है। जब इस तकनीक को एक पुुल-फेस्ड मास्क या प्लास्टिक शील्ड के साथ उपयोग किया जाता है तो 'कूलिंग और सर्कुलेशन' तकनीक एथलीट के चेहरे के चारों ओर एक पॉजिटिव प्रेशर का वातावरण बनाती है जिससे बाहर से कोई वायरस या विषाक्त कण हेलमेट में प्रवेश नहीं कर पाते। इस बीच, एयरफ्लो के कारण सीधे एथलीट की आंखों को सूखने से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हेलमेट की इस कूलर तकनीक को और अधिक आरामदायक बनाने के लिए वेंटिलेशन प्वॉॅइंट्स भी हैं। यह 'हेल्मेट कूलिंग और सर्कुलेशन' तकनीक पोर्टेबल पावर पैक के साथ आठ घंटे तक चल सकता है जिससे खिलाड़ी पूरे गेम या अभ्यास के समय अपने हेलमेट पहने रख सकते हैं।
अमरीकी फुटबॉल हेलमेट का बाजार सालाना करीब 150 मिलियन है जो कॉलेज टीम के हेल्मेट को जोड़कर करीब 57 मिलियन डॉलर का हो जाता है। नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशनए या एनसीएए के अनुसार हाई स्कूल फुटबॉल टीमों में 10 लाख से अधिक प्रतिभागी नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट हाई स्कूल एसोसिएशन के अनुसार यह नई तकनीक व्यवसायिक रूप से सफल हो सकती है।
Published on:
10 Sept 2020 03:25 pm
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