
शोध में सामने आया कि 75 फीसदी गेमर्स मेंटल हैल्थ के लिए खेलते हैं वीडियो गेम
कोरोना महामारी (corona pandemic) में लॉकडाउन (lockdown) के दौरान घर में कैद हो जाने के कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा। इससे उबरने के लिए लोगों ने अलग-अलग उपाय अपनाएं। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावी रहा वीडियो गेम (video games) खेलना। दरअसल वीडियो गेम एसेसरीज और ऐसे ही दूसरे सामान बेचने वाली एक वेबसाइट वी पीसी की ओर से हाल ही एक सर्वे करवाया गया जिसमें गेमर्स ने बताया कि कोरोना काल में लॉकडाउन की बोरियत को दूर करने के लिए उन्होंने वीडियो गेम्स खेले और इससे उन्हें सकारात्मक बने रहने में काफी मदद मिली। यूं तो वीडियो गेमिंग को लेकर ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि इससे हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसमें नकारात्मक जीवन शैली, असामाजिक व्यवहार और खराब मानसिक स्वास्थ्य प्रमुख हैं। हालांकि, जब कॉरोना वायरस के स्वास्थ्य संकट के बीच दुनिया ने लॉकडाउन के महीनों अपने घर में कैद होकर बिताए उस समय गेमिंग ने दुनियाभर में लाखों नए खिलाडिय़ों को आकर्षित किया।
गेमिंग उद्योग पर कोविड-19 का असर
लॉकडाउन के दौैरान पूरी दुनिया में गेमिंग की मांग ने सभी प्लेटफॉर्मों पर नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। लोग, यहां तक कि जो लोग गेमिंग के शौकीन नहीं थे उन्होंने भी इस दौरान खूब गेम खेले। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरी दुनिया में कारेोना के 7-8 महीनों के दौरान ही गेमिंग वर्ल्ड में कुल 2.7 अरब (2.7 billion) गेम डाउनलोड किए गए। यह दुनिया भर में मोबाइल ऐप का उपयोग कर गेम खेलने के मामले में यह अभी तक का सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गया।
64 फीसदी ने पहली बार खेला
शोध में भाग लेने वाले गेमर्स में से 64 फीसदी ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने पहली बार कोई ऑनलाइन या ऐप आधारित गेम खेला था। इन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान वचीडियो गेम्स खेलने पर प्रति सप्ताह 1 से 10 घंटे बिताए। यह पेशेवर गेमर्स की तुलना में कहीं अधिक है क्योंकि वीडियो गेम्स खेलने के लिए प्रति सप्ताह इतना समय देने वाले 18 से 29 वर्ष की आयु के केवल 8 फीसदी ही खिलाड़ी ही हैं। हार्डकोर पेशेवर वीडियो गेमर्स प्रति सप्ताह 31 घंटे या उससे अधिक खेलते हैं। वहीं कैजुअल गेमर्स ज्यादातर स्मार्टफोन, गेमिंग कंसोल या कंप्यूटर जैसे मोबाइल गैजेट्स पर खेलते हैं। यह अमरीका में मोबाइल फोन गेमर्स पर 203 मिलियन या दुनिया भर में करीब 2.2 बिलियन मोबाइल गेम्स के 10 फीसदी वृद्धि है।
मानसिक स्वास्थ्य पर गेमिंग का प्रभाव
पिछले शोधों में ध्यान, धारणा, निर्णय लेने और खराब स्मृति सहित हमारी बुनियादी मानसिक प्रक्रियाओं पर वीडियो गेम खेलने के स्थायी सकारात्मक प्रभावों के प्रमाण मिले हैं। 2018 में कैजुअल गेमिंग बैक पर एक अध्ययन में कहा गया था कि 63 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे समय बिताने के लिए खेलते हैं। जबकि हाल ही में हुए डब्ल्यूईपीसी सर्वेक्षण से पता चला है कि 75 फीसदी उत्तरदाता अपने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए गेम खेलते हैं। वहीं 46 फीसदी गेमर्स व्याकुल होने पर और 29.2 फीसदी मानसिक रूप से खुद को सक्रिय रखने के लिए वीडियो गेम्स खेलते हैं।
आखिर वीडियो गेम क्यों खेलते हैं लोग?
पुरानी पीढ़ी के 60 से अधिक आयु वर्ग के 64 फीसदी लोग अपने पसंदीदा खेलों की सूची में शीर्ष पर रहने के लिए खेलते हैं। उनमें से अधिकांश ने डेस्कटॉप पर खेलने में एक से 10 घंटे का समय बिताया जबकि केवल 39 फीसदी ने मोबाइल पर कोई गेम खेला। दरअसल लोगों ने बताया कि वीडियो गेम खेलने से कर्मचारियों के समग्र कार्य प्रदर्शन में सुधार हो सकता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो आंखों के समन्वय, ध्यान, उत्कृष्ट स्मृति और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस करते हैं। ऐसे ही कुछ वीडियो गेम्स मल्टी-टास्किंग स्किल भी बढ़ा सकते हैं। जबकि एक्शन गेम खेलते समय ध्यान देने की अवधि और ट्रैकिंग कौशल में सुधार किया जा सकता है, साथ ही यह आवेग को कम कर सकता है।
Published on:
23 Oct 2020 05:55 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
