5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Nipah Virus Vaccine: खत्म होगा निपाह वायरस का खौफ, जापान ने बना दी वैक्सीन! इंसानों पर ट्रायल होगा शुरू

Nipah Virus Vaccine: निपाह वायरस जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ जापान की नई वैक्सीन पर इंसानों में ट्रायल शुरू। जानिए कैसे काम करेगी यह वैक्सीन।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Feb 05, 2026

Nipah Virus Vaccine

Nipah Virus Vaccine (photo- gemini ai)

Nipah Virus Vaccine: जापान के शोधकर्ताओं की एक टीम ने निपाह वायरस जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ एक वैक्सीन को लेकर बड़ी उम्मीद जगाई है। टोक्यो यूनिवर्सिटी में विकसित यह वैक्सीन अब इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस वैक्सीन का फेज-1 ट्रायल अप्रैल से बेल्जियम में शुरू होगा। निपाह वायरस की मौत की दर 40 से 75 प्रतिशत तक मानी जाती है और फिलहाल इसके लिए कोई पक्का इलाज या लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन मौजूद नहीं है, इसलिए यह खबर बेहद अहम मानी जा रही है।

यह जानकारी ऐसे समय पर सामने आई है, जब भारत में जनवरी महीने में पश्चिम बंगाल से निपाह के दो मामले सामने आए थे। इससे साफ है कि यह वायरस सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है और दुनिया के कई हिस्सों के लिए खतरा बना हुआ है।

वैक्सीन कैसे काम करेगी?

रिपोर्ट के अनुसार, यह वैक्सीन खसरा (Measles) वायरस के बदले हुए रूप पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने खसरे के वायरस में निपाह वायरस की जेनेटिक जानकारी का एक हिस्सा डाला है। जब यह वैक्सीन इंसान के शरीर में दी जाती है, तो शरीर में निपाह वायरस जैसे एंटीजन प्रोटीन बनते हैं। इससे हमारा इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है और शरीर की रक्षा क्षमता मजबूत होती है, जिससे बीमारी के लक्षण उभरने से पहले ही रोकथाम हो सकती है। खास बात यह है कि खसरे का यह बदला हुआ वायरस पहले से ही दुनिया भर में वैक्सीन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, यानी इसकी बुनियादी सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिकों को भरोसा है।

जानवरों पर सफल ट्रायल

इस वैक्सीन को पहले हैम्स्टर पर टेस्ट किया जा चुका है, जहां इसकी सुरक्षा और असर दोनों को सही पाया गया। अब अगला कदम इंसानों पर इसका परीक्षण करना है।

इंसानों पर ट्रायल

फेज-1 ट्रायल में 60 स्वस्थ लोगों को शामिल किया जाएगा। इस चरण का मकसद यह देखना है कि वैक्सीन इंसानों के लिए कितनी सुरक्षित है और शरीर उस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

दुनिया में चल रहे दूसरे प्रयास

इसी बीच, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम भी निपाह वैक्सीन पर काम कर रही है। उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश में फेज-2 ट्रायल शुरू किया है, जिसमें 18 से 55 साल के करीब 300 लोग शामिल होंगे।

निपाह वायरस कितना खतरनाक?

निपाह वायरस को WHO ने प्राथमिकता वाली बीमारियों की लिस्ट में रखा है। यह एक जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। आमतौर पर यह चमगादड़ों से इंसानों में, दूषित फल या खाने-पीने की चीजों के जरिए फैलती है। सूअरों से भी इंसानों में संक्रमण हो सकता है और कई बार इंसान से इंसान में भी फैलता है, खासकर अस्पतालों में। इस बीमारी में हल्के लक्षणों से लेकर गंभीर सांस की बीमारी और दिमाग की सूजन (एन्सेफलाइटिस) तक हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में यह नई वैक्सीन निपाह के खिलाफ एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।