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ओलंपिक चैम्पियन ने मैराथन दौड़कर मनाई कैंसर को हराने की खुशी

मैराथन में दौड़कर कैंसर रिकवरी की मनाई खुशी-ओलंपिक चैंपियन ने न्यूयॉर्क सिटी मैराथन में दौड़कर अपने कैंसर की रिकवरी का सम्मान किया

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जयपुर

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Mohmad Imran

Nov 23, 2019

ओलंपिक चैम्पियन ने मैराथन दौड़कर मनाई कैंसर को हराने की खुशी

ओलंपिक चैम्पियन ने मैराथन दौड़कर मनाई कैंसर को हराने की खुशी

हाल ही में न्यूयॉर्क सिटी में आयोजित 46.16 किमी मैराथन दौड़ में 36 साल की किक्कन रैन्डाल ने भी हिस्सा लिया। जब उन्होंने रेस पूरी की तो उनका उत्साह देखने लायक था। उनके मोजे पर लिखा था 'इट्स गोइंग टू बी ओके' जिसमें गुलाबी रंग से लिखे बड़े के का आशय उनके नाम से था। दरअसल किक्कन हाल ही में कैंसर की जंग जीती हैं और जल्द ही उन्हें इससे पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। 'किकएनिमल' के नाम से मशहूर इस ओलंपिक चैम्पियन स्कीअर ने 2017 के जियोंगचांग खेलों में रेस्स्सी डिगिंस के साथ टीम के रूप में अमरीका के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था।

लेकिन इस ओलंपिक मेडल जीतने के तीन महीने बाद ही उन्हें स्तन केंसर के स्टेज-२ का पता चला। लेकिन उन्होंने इसे भी मुकाबले की तरह लियश और विजयी बनकर लोटी हैं। 3 सप्ताह में 6 राउण्ड कीमोथैरेपी और लम्पेक्टोमी के बाद उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। लेकिन वेे अपनी जीत की खुशी को अलग अंदाज में सेलिब्रेट करना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने 50 हजार से ज्यादा धावकों के साथ पहली आर किसी मैराथन में हिस्सा लिया और इसे पूरा भी किया। वे इस मैराथन दौड़ के माध्यम से breast cancer के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाना और महिलाओं को हार न मानने के लिए प्रेरित करना चाहती थीं।

एक एथलीट और कैंसर सर्वाइवर
रैंन्डाल का कहना है कि एक एथलीट और एक कैंसर पेशेंट दोनों का अनुभव देखने के बाद उन्होंने जीवन को पहले से ज्यादा सकारात्मक तरीके से जीना शुरू कर दिया है। स्कीइंग में 17 अमरीकी राष्ट्रीय टाइटन जीतने वाली रैन्डाल का कहना है कि एक एथलीट होने के कारण ही वे कैंसर के खिलाफ इस लड़ाई में जीत सकीं। उनके गोल्ड मेडल जीतने पर स्तन कैंसर के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्था एकेटीआइवी ने उनका सम्मान किया क्योंकि उनका मानना था कि रैन्डाल उनकी संस्था की सैकड़ों कैंसर पेशेंट महिलाओं को प्रेरित करती हैं। लेकिन कुछ ही सप्ताह में रैन्डज्ञल ने संस्था को फोनकर कहा कि अब उनका रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो गया है क्योंकि वे खुद इससे गुजर रही हैं। इसलिए ठीक होने के बाद उन्होंने संस्था की ओर से आयोजित मैराथन में दौड़कर लोगों को प्रेरित करने का काम किया।