
क्या ओमिक्रॉन दे सकता है एंटीबॉडी वैक्सीन को चकमा
नई दिल्ली। ओमिक्रॉन पर वैक्सीन के दो डोज ले चुके लोगों पर जो अध्ययन किया गया, ओमिक्रोन के खिलाफ वैक्सीन की दो डोज प्रभावी नहीं हैं। कम एंटीबॉडी होने पर दोबारा संक्रमण होने का खतरे की संभावना है। ये अध्ययन उन्होंने एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड या फाइजर-बायो एनटेक की दो डोज ले चुके लोगों के खून के सैंपल इकट्ठा करके किया है। ऐसे वैक्सीनेटेड लोगों के खून के सैंपल से पाया गया कि इन लोगों में ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए एंटीबॉडी की पर्याप्त मात्रा में कमी है।
तीसरी लहर की आहट है
(WHO) ने ओमिक्रॉन के बारे में बताया है की वह उसी तरीके से भारत में प्रवेश कर सकता है जैसे अमेरिका में किया । और उतनी ही तेजी से वह लोगों को अपना शिकार भी बना रहा है। आईएमए ने केन्द्र सरकार को इस बात के लिए आगाह भी किया है कि जल्द से जल्द हेल्थ केयर वर्कर्स का टीकाकरण किया जाए।
कैसा है नया वेरिएंट
मौजूद डेल्टा वायरस जानलेवा है और इसके साथ ही ओमिक्रॉन काफी संक्रामक। ओमिक्रॉन इम्यूनिटी को चकमा भी दे सकता है। इन परिस्थितियों में दोनों के मेल से यदि कोई तीसरा वेरिएंट आता है तो निश्चित वह सुपरस्प्रेडर हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह कैसा होगा इसकी कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है, संभव है वह जानलेवा भी हो।
बूस्टर डोज की जरुरत
COVID-19 टीके वाले लोगों के एंटीबॉडी मूल वायरस की तुलना में ओमिक्रॉन को बेअसर करने में काफी कम प्रभावी थे।पहले से संक्रमित व्यक्तियों के एंटीबॉडी से ओमिक्रॉन को बेअसर करने की संभावना भी कम थी।अध्ययन से पता चलता है कि जिन लोगों को फाइजर या मॉडर्ना टीकों का बूस्टर शॉट मिला है, उनकी बेहतर सुरक्षा होने की संभावना है, हालांकि उनके एंटीबॉडी ने भी ओमिक्रॉन के खिलाफ कम निष्क्रिय गतिविधि का प्रदर्शन किया।
Updated on:
26 Dec 2021 10:33 am
Published on:
26 Dec 2021 10:31 am
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
