
संक्रमण थोड़ा पीड़ादायक हो सकता है क्योंकि तरल का निर्माण होने से कान के परदे पर दबाव पड़ता है।
कान के पर्दे का संक्रमण जिसे ओटिटिस मीडिया भी कहा जाता है, यह संक्रमण बच्चों और नवजातों में होने वाली एक आम समस्या है, लेकिन यह समस्या वयस्कों को भी हो सकती है। लगभग 90 प्रतिशत बच्चों में से कम से कम एक को तीन वर्ष की आयु तक कान का संक्रमण हो जाता है। संक्रमण थोड़ा पीड़ादायक हो सकता है क्योंकि तरल का निर्माण होने से कान के परदे पर दबाव पड़ता है। कान के संक्रमण घरेलू उपचारों से भी ठीक हो जाते हैं, लेकिन अधिक गंभीर मामलों में या छोटे बच्चों में होने वाले संक्रमण में कान के संक्रमण को पूरी तरह से ठीक करने के लिए डॉक्टरी उपचार की आवश्यता होती है।
वजह : बच्चों में कान व नाक की संरचना नाजुक होती है ऐसे में मौसम का बदलाव इनके बीच स्थित यूस्टेशियन ट्यूब के कार्य को बाधित करता है। इस कारण कान के पर्दे के पीछे विपरीत असर होने से सूजन आती है व बच्चा दर्द से अचानक रोने लगता है। इसके अलावा कान में किसी प्रकार की चोट, गले व साइनस की तकलीफ या एडेनॉइड टिश्यू का बढऩा भी रोग को जन्म देता है। कुछ बच्चों में एलर्जी के कारण जुकाम भी इंफेक्शन को बढ़ाता है। इस स्थिति में कई बार माता-पिता कान में तेल डाल देते हैं, जो गलत है। इससे समस्या और बढ़ सकती है।
लक्षण : अचानक कान में तेज दर्द, बुखार व कान को हाथ लगाकर रोते रहना। सुनाई कम देने के साथ असहज महसूस करना। कई बार समस्या बढऩे पर कान से मवाद या पानी निकलना जिससे दर्द में कमी का अहसास होता है।
इलाज : एंटीबायोटिक दवाओं के अलावा एंटीकोल्ड और दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। जुकाम होने की स्थिति में नेजल ड्रॉप देते हैं। रात के समय यदि बच्चा दर्द से ज्यादा परेशान हो तो फस्र्टएड के रूप में दर्दनिवारक दवा दे सकते हैं और सुबह विशेषज्ञ से संपर्र्क करें।
ऐसे करें बचाव
कान में पानी न जाने दें।
जुकाम को बढऩे न दें। इसका तुरंत इलाज करवाएं।
धूल-धुएं के संपर्क में आने से बचें।
खुद से कान की सफाई करने का प्रयास न करें।
कान में तेल न डालें।
Published on:
04 Sept 2017 03:55 pm
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