4 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रोज Coffee पीते हैं? सावधान! आपके हार्मोन और खून में पहुंच सकता है प्लास्टिक, जानें इसके सेफ ऑप्शन

Paper Cup Health Risks: पेपर कप में छुपी प्लास्टिक लेयर गर्म कॉफी (Coffee) में माइक्रोप्लास्टिक मिलाती है, जो हार्मोन, गट और मेटाबॉलिक हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती है। जानें सुरक्षित विकल्प।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Nov 23, 2025

Paper Cup Health Risks

Paper Cup Health Risks (photo- freepik)

Paper Cup Health Risks: आजकल ज्यादातर लोग सुबह की शुरुआत एक कप कॉफी (Coffee) या चाय से करते हैं, और बाहर से कॉफी लेने का ट्रेंड भी बहुत बढ़ गया है। हमें लगता है कि पेपर कप प्लास्टिक से बेहतर और सुरक्षित होते हैं। लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट खुशी छाबड़ा के अनुसार, यही पेपर कप हमारी सेहत को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पेपर कप में होता है छुपा प्लास्टिक

दिखने में पेपर कप पूरी तरह कागज के बने लगते हैं, लेकिन असलियत ये है कि लगभग हर डिस्पोजेबल पेपर कप के अंदर एक पतली प्लास्टिक की लेयर लगी होती है। इसे इसलिए लगाया जाता है ताकि कप गीला न हो और लीक न करे। समस्या तब शुरू होती है जब हम इसमें गर्म कॉफी या चाय डालते हैं। गर्म पेय पदार्थ प्लास्टिक की इस परत को पिघलाने लगते हैं और इससे माइक्रोप्लास्टिक कप से निकलकर आपकी कॉफी में घुल जाते हैं।

हर घूंट के साथ शरीर में घुसते हैं माइक्रोप्लास्टिक

माइक्रोप्लास्टिक इतने छोटे होते हैं कि आपको दिखाई भी नहीं देते। आप बिना जाने हर घूंट के साथ इन्हें शरीर में ले लेते हैं। शोधों में यह माइक्रोप्लास्टिक पानी, मिट्टी, समुद्री खाने, यहां तक कि मां के दूध और खून में भी पाए जा चुके हैं। इससे पता चलता है कि ये शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलते।

माइक्रोप्लास्टिक गर्म कॉफी में ज्यादा निकलते हैं

खुशी छाबड़ा बताती हैं कि तापमान जितना ज्यादा होगा, पेपर कप की प्लास्टिक लेयर उतनी जल्दी टूटती है। जब गर्म कॉफ़ी कप में डाली जाती है, तो हजारों माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स आपकी ड्रिंक में घुल जाते हैं। यानी आपकी रोज की टेकअवे कॉफी आपको प्लास्टिक भी पिला रही है, और आपको पता भी नहीं चलता।

क्या असर डालते हैं माइक्रोप्लास्टिक?

शरीर में जाने के बाद माइक्रोप्लास्टिक सिर्फ पेट के रास्ते बाहर नहीं जाते, बल्कि खून तक पहुंच सकते हैं। इनके नुकसान धीरे-धीरे और चुपचाप शुरू होते हैं। हार्मोनल गड़बड़ी (विशेषकर महिलाओं में एस्ट्रोजन डॉमिनेंस) गट हेल्थ यानी आंतों पर असर, इंफ्लेमेशन, मेटाबॉलिज्म के प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप, समस्या यह है कि यह नुकसान तुरंत दिखाई नहीं देता। महीनों या सालों में शरीर में प्लास्टिक जमा होता रहता है।

क्या है इसके दूसरे ऑप्शन

स्टेनलेस स्टील टम्बलर का इस्तेमाल करें। घर से री-यूजेबल कप लेकर जाएं। कैफे में सिरेमिक कप मांगें। पेपर कप में गर्म ड्रिंक ज्यादा देर न रखें। यह छोटी-सी आदत आपकी सेहत को माइक्रोप्लास्टिक से बचा सकती है और साथ ही पर्यावरण की भी सुरक्षा करती है।