
Parkinson's Treatment (Image- gemini)
Parkinson's Treatment: आजकल शारीरिक से ज्यादा मानसिक परेशानियों ने जीना हराम कर रखा है। बिमारियों के ऐसे कारण सामने आ रहे हैं जिनके बारे में सोचना भी नामुमकिन लगता है। हाल ही में एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो पार्किंसंस बीमारी को ठीक कर सकती है।
जी हां, नेचर सस्टेनेबिलिटी जर्नल के एक शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने इंजीनियरिंग बैक्टीरिया का उपयोग करके सामान्य प्लास्टिक कचरे (PET) को पार्किंसंस रोग के इलाज में काम आने वाली दवाओं में बदल दिया है। आइए डॉक्टर संदीप जोशी (फिजिशियन) से जानते हैं की क्या है यह नई तकनीक और पार्किंसंस डिजीज क्या होती है? इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं?
लेवोडोपा (Levodopa) पार्किंसंस रोग की दवाई है। वैज्ञानिकों ने इंजीनियरों की मदद से ऐसे सूक्ष्मजीव (Bacteria) तैयार किए हैं जो प्लास्टिक को खाकर उसे रसायनों में बदल सकते हैं। प्लास्टिक की बोतलों (PET) को पहले तोड़ा गया और फिर बैक्टीरिया की मदद से उसे पार्किंसंस की दवा के मुख्य घटक में बदल दिया गया। यह दुनिया का पहला ऐसा प्रयोग है जहां बैक्टीरिया प्लास्टिक को खाकर बीमारी की दवा बनाने में सहायक हो सकते हैं।
जब हमारे दिमाग के Substantia Nigra में कोशिकाएं मर जाती हैं, तो शरीर में डोपामाइन हार्मोन की कमी हो जाती है। डोपामाइन की कमी से दिमाग शरीर की मांसपेशियों को सही सिग्नल नहीं भेज पाता, जिससे शरीर पर नियंत्रण खत्म होने लगता है, इसी कारण से पनपती है पार्किंसंस डिजीज।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
16 Apr 2026 05:04 pm
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