
कैंसर की दवाओं की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)
Cancer Medicine Shortage: कैंसर का इलाज सिर्फ बीमारी से लड़ने की नहीं, बल्कि उम्मीद बनाए रखने की भी लड़ाई होती है। ऐसे में अगर इलाज के लिए जरूरी दवाएं ही न मिलें तो मरीजों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। इन दिनों भारत में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो अहम दवाएं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की कमी की खबरें सामने आ रही हैं।
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन का इस्तेमाल फेफड़ों के कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ओवेरियन कैंसर, सिर और गर्दन के कैंसर समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। ऑन्कोलॉजिस्ट इन्हें कैंसर उपचार की सबसे महत्वपूर्ण दवाओं में गिनते हैं। कई मरीजों के लिए ये दवाएं इलाज का मुख्य हिस्सा होती हैं और इनके बिना तय समय पर कीमोथेरेपी देना मुश्किल हो सकता है।
देश के कई सरकारी और निजी अस्पतालों ने इन दवाओं की कमी की पुष्टि की है। शुरुआत में कुछ अस्पतालों ने अपने पुराने स्टॉक से काम चलाया, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में दवाओं का भंडार लगातार कम होता गया। स्थिति यह है कि मरीज और उनके परिवार कई मेडिकल स्टोर और अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं ताकि कहीं से दवाएं मिल सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के इलाज में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। कीमोथेरेपी का हर सत्र एक तय शेड्यूल के अनुसार दिया जाता है। दिल्ली AIIMS के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. एमडी रे के मुताबिक, यदि दवाएं उपलब्ध नहीं होती हैं तो इलाज की योजना प्रभावित हो सकती है। इससे कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा बढ़ सकता है और मरीज के ठीक होने की संभावना पर भी असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टरों को कीमोथेरेपी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ रही है, जबकि कुछ मरीजों के लिए वैकल्पिक दवाओं पर विचार किया जा रहा है।
इस संकट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) की कमी है। इसके अलावा, उत्पादन लागत बढ़ने और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने भी समस्या को गंभीर बना दिया है। दवा निर्माता कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।
सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन दोनों दवाएं प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाएं हैं। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्लैटिनम की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई में व्यवधान ने भी इस स्थिति को और खराब किया है।
दुर्भाग्य से इन दवाओं का हर मरीज के लिए आसान विकल्प उपलब्ध नहीं है। कई कैंसर प्रकारों में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन को सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इस कमी को लेकर चिंता जता रहे हैं।
यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य कैंसर का इलाज करा रहा है, तो घबराने के बजाय अपने ऑन्कोलॉजिस्ट के संपर्क में रहें। बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज में बदलाव न करें और दवाओं की उपलब्धता को लेकर अस्पताल से नियमित जानकारी लेते रहें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
6 Jun 2026, 12:20 PM IST
Published on:
6 Jun 2026, 12:20 PM IST
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