
Patrika Explainer: This treatment don't target Coronavirus, but damaged cell
नई दिल्ली। कोरोना को लेकर एक नए इलाज का तरीका काफी प्रभावी पाया गया है। इस इलाज के प्रयोगशाला मॉडल के अंतर्गत यह पद्धति SARS-CoV-2 के खिलाफ सीधे वायरस से लड़ने के बजाय कोशिकाओं की क्षति को ठीक करने पर केंद्रित है।
इस संबंध में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, यदि यह इलाज इंसानी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित पाया जाता है, तो यह एंटी-वायरल इलाज कोविड-19 के लक्षणों को हल्का कर देगा और रिकवरी के समय को तेज कर देगा।
दरअसल, कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिए इलाज के मौजूदा तरीके एंटीवायरल दवाओं के साथ ही वायरस को निशाना बनाते हैं। लेकिन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस पारंपरिक तरीके के बजाय वायरस के लिए शरीर की सेलुलर रिस्पॉन्स (कोशिकाओं की प्रतिक्रिया) को निशाना बनाने के लिए ध्यान केंद्रित किया है।
पीएलओएस पैथोजंस में प्रकाशित अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने पाया कि जब प्रयोगशाला में विकसित कोशिकाएं SARS-CoV-2 से संक्रमित होती हैं, तो यह 'अनफोल्डेड प्रोटीन रिस्पांस' (UPR) नामक तीन तरीकों से संकेत देने वाले रास्तों की सभी तीन शाखाओं को सक्रिय करती हैं। दवाओं का इस्तेमाल करके सामान्य सेल फ़ंक्शन को बहाल करने के लिए यूपीआर को रोकना भी वायरस के फैलने को काफी कम करने के लिए पाया गया था।
दवाओं का इस्तेमाल करते हुए, शोधकर्ता इस कोशिकीय मार्ग की सक्रियता को उलटने में सक्षम थे और इससे कोशिकाओं के अंदर वायरस का उत्पादन लगभग पूरी तरह से कम हो गया। इसका अर्थ है कि संक्रमण अन्य कोशिकाओं में नहीं फैल सकता है।
वर्तमान में कोविड-19 के इलाज के लिए इस्तेमाल में आने वाली एंटी-वायरल दवाएं, जैसे कि रेमेडेसिविर, वायरस के खुद को बढ़ाने को निशाना बनाती हैं। लेकिन अगर कोरोना वायरस इन दवाओं के लिए प्रतिरोध विकसित कर लेता है तो वे काम नहीं करेंगे।
इसके विपरीत नया इलाज संक्रमित कोशिकाओं की प्रतिक्रिया को निशाना बनाता है। बयान में कहा गया है कि नए वेरिएंट सामने आने पर भी यह नहीं बदलेगा, क्योंकि वायरस को दोहराने के लिए इस सेलुलर प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। अब अगला कदम चूहे के मॉडल में इलाज का परीक्षण करना है।
Updated on:
24 Jun 2021 07:31 pm
Published on:
24 Jun 2021 07:20 pm
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