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Covid-19: वे लोग पर्सनल हाइजीन को लेकर ज़्यादा सतर्क जो मास्क पहनने को लेकर ज़्यादा गंभीर, शोध में हुआ खुलासा

फेस मास्क लगाने से न सिर्फ वायरस से सुरक्षा मिलती है बल्कि मास्क लगाने वाले अपने हाथ साफ करना नहीं भूलते।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Aug 04, 2020

Covid-19: वे लोग पर्सनल हाइजीन को लेकर ज़्यादा सतर्क जो मास्क पहनने को लेकर ज़्यादा गंभीर, शोध में हुआ खुलासा

Covid-19: वे लोग पर्सनल हाइजीन को लेकर ज़्यादा सतर्क जो मास्क पहनने को लेकर ज़्यादा गंभीर, शोध में हुआ खुलासा

पांच महीने से कोरोना संक्रमण (Corona Virus) के साथ रहने के बाद जहां कुछ लोग पर्सनल हाइजीन और आस-पास की स्वच्छता को लेकर पहले से ज़्यादा सतर्क हो गए हैं वहीँ कुछ लोग अब भी कोरोना संक्रमण (Covid-19) के लिए जारि की गयी गाइडलाइन (Guideline) का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहे हैं। फेस मास्क लगाकर सार्वजनिक स्थानों पर जाना हो या बाहर से आने पर खुद को अच्छी तरह से सनीटाइज़ करना नियमों में ढिलाई बरतने के कारण भारत में तेज़ी से कोरोना के मरीज़ बढ़ रहे हैं। स्वच्छता सम्बन्धी इन आदतों के बारे में हाल ही हुए एक शोध में भी ये बात सामने आयी है। दरअसल ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में इस बात का पता लगाया है कि फेस मास्क लगाने से न सिर्फ वायरस से सुरक्षा मिलती है बल्कि मास्क लगाने वाले अपने हाथ साफ करना नहीं भूलते। यह शोध बीएमजे जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस वक्त दुनिया के 160 देशों में मास्क लगाना अनिवार्य किया जा चुका है पर अमेरिका और यूरोप के देशों में अब भी मास्क लगाने को लेकर लोग सहमत नहीं हैं।

मास्क को लापरवाही से जोड़ रहे लोग
मास्क न लगाने वाले ऐसे लोगों का तर्क है की जिस तरह हेलमेट लगाकर लोग लापरवाही से बाइक चलाते हैं, वैसे ही मास्क लगाने के बाद लोग वायरस से बचाव के तरीकों के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। इसी तर्क की वैज्ञानिकता जांचने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University) और किंग्स कॉलेज लंदन (Kings College London) के शोधकर्ताओ के दल ने यह अध्ययन किया। वैज्ञानिकों को शोध में इस बात का एक भी आधार नहीं मिला। बल्कि उनका कहना है कि मास्क लगाने वाले लोग अपने हाथ धोने को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं।

अध्ययन में इन बातों को किया शामिल
वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के एक समूह को मास्क पहनाकर और दूसरे समूह को बिना मास्क के रखा। उन्हें ऐसे वातावरण में रखा गया जहां पर सर्दी खांसी फैलाने वाले वायरसों की मौजूदगी की संभावना अधिक थी। 22 समीक्षात्मक परीक्षणों के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जो प्रतिभागी मास्क लगा रहे थे, वे अपनी सतर्कता के प्रति ज्यादा गंभीर थे। जबकि मास्क न लगाने वाले प्रतिभागी अपने हाथ भी नियमित रूप से नहीं धो रहे थे। इस आधार पर वैज्ञानिक डॉक्टर जुलियन तांग का कहना है कि मास्क लगाने से लोगों को मनोवैज्ञानिक तौर पर प्रेरणा मिलती है कि जिससे वे खुद को सुरक्षित करने के लिए ज्यादा गंभीर कदम उठाते हैं। वे कहते हैं कि मास्क पहनने वाले से व्यवहार का यह बदलाव संक्रमण रोकने अहम है।