
आईबीएस की परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति को प्लेसिबो तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मरीज को कुछ दवाएं तो दी जाती हैं लेकिन आईबीएस के लिए नहीं क्योंकि ये कोई बीमारी नहीं है। रोगी को पौष्टिक आहार और फाइबर युक्त भोजन खाने की सनाह के साथ बाहर के खाद्य पदार्थो का इस्तेमाल करने को मना किया जाता है। इसके कुछ समय बाद ही रोगी बेहतर महसूस करता है और उसकी परेशानी खत्म हो जाती है।
अग्नि में विकृति से होती तकलीफ
दस्त, कब्ज , खट्टी डकार, पाचन तंत्र के खराब होने को आयुर्वेद की पद्धती में गृहणी दोष कहते हैं। इसमें रोगी को इस बात की आशंका बनी रहती है कि उसे कोई गंभीर रोग होने वाला है। इसका प्रमुख कारण शरीर की अग्नि में विकृति आना होता है जिसकी वजह से कई तरह के लक्षण दिखते हैं जिसके बाद व्यक्ति खुद को रोगी मानने लगता है।
आयुर्वेद में पेट का जोरदार इलाज
गृहणी दोष (आईबीएस) की तकलीफ से निजात दिलाने में डॉक्टरी सलाह बेहद कारगर होती है। इसके साथ ही बेल, कच्चे बेल का विल्व चूर्ण, छांछ, भुना जीरा काले नमक के साथ खाने से फायदा मिलेगा। आईबीएस में अतीश, भ्रामी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा डॉक्टरी सलाह पर लिया जाए तो फायदा मिलता है। ध्यान , श्वशासन, प्राणायाम करने से भी राहत मिलती है।
होम्योपैथी में सवालों के जवाब से तय करते इलाज
आंत की तकलीफ (आईबीएस) से निजात के लिए खानपान को ठीक रखने के साथ दिमाग को शांत रखा जाए तो समस्या दूर हो जाएगी। तरल पदार्थो का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। सूर्यास्त के बाद खाना न खाएं, देर रात तक मोबाइल फोन का प्रयोग न करें, किसी तरह की कोई तकलीफ है तो उसे घर-परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें ये दवा की तरह काम करेगी। जो दवाएं दी जाती हैं वो चिंता को दूर करने के लिए दी जाती हैं। डॉक्टर के पास पहुंचने पर मरीज से ये पूछा जाता है कि आखिरी बार वो कब और किस काम से पीछे हटा था। किस काम से क्यों बचता है। इन सवालों के जवाब से ही दवा दी जाती है जिसके कुछ समय बाद वो पूरी तरह ठीक हो जाता है।
डॉ. हरीश भाकुनी, आयुर्वेद विशेषज्ञ
डॉ. अमित खंडेलवाल, होम्योपैथी विशेषज्ञ
Published on:
20 Mar 2018 05:09 pm
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