
Palpitations| image credit gemini
Heart Palpitations Causes: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार अचानक महसूस होता है कि दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को पैल्पिटेशन या पल्पिटेशन (Palpitations) कहा जाता है। आजकल हार्ट से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में लोगों को घबराहट होने लगती है यह सोच के कि कहीं दिल से जुड़ी उन्हें कोई बीमारी तो नहीं ना हो गई है। वैसे तो इससे जुड़े ज्यादातर मामलों में यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती, बल्कि शरीर का एक सामान्य रिएक्शन होता है। फिर भी इसे सही समय पर समझना इसलिए जरूरी है ताकि आप बिना डरे इसका सही कारण जान सकें और जरूरत पड़ने पर सही इलाज करा सकें। आइए आज के इस लेख में पैल्पिटेशन क्या है यह क्यों होता है और यह होने पर क्या करना चाहिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
दिल की धड़कन तेज होने के पीछे अक्सर कई बार बहुत ज्यादा स्ट्रेस, मानसिक चिंता या जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करने से शरीर का सिस्टम तेज होने जैसी कई ऐसी वजहें भी होती हैं जिनका सीधा संबंध दिल की बीमारी से नहीं होता। इसके अलावा, दिन भर में बहुत ज्यादा चाय-कॉफी यानी कैफीन का सेवन करते हैं, स्मोकिंग करते हैं या शराब पीते हैं, तो भी धड़कन अचानक बढ़ सकती है। इसके अलावा शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया, थायराइड की समस्या या सोडियम-पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने से भी ऐसा महसूस होता है। इसके अलावा नाक बंद होने पर ली जाने वाली ड्रॉप्स या अस्थमा की कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट से भी कभी-कभी दिल की रफ्तार अचानक तेज हो सकती है।
ज्यादातर समय में यह स्थिति सामान्य होती है और थोड़ी देर में खुद ठीक हो जाती है, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। अगर आपको कभी-कभार हल्का सा ऐसा महसूस होता है और आप बाकी समय बिल्कुल फिट रहते हैं, तो आमतौर पर घबराने की कोई बात नहीं होती। लेकिन, अगर यह तेज धड़कन कई मिनटों या घंटों तक बनी रहे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। खास तौर पर अगर धड़कन बढ़ने के साथ-साथ आपको चक्कर आ रहे हों, सांस लेने में तकलीफ हो रही हो, सीने में भारीपन लगे या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें।
धड़कन के ज्यादा देर तक तेज रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। आपकी स्थिति को समझने के लिए डॉक्टर आपकी लाइफस्टाइल और लक्षणों के बारे में बात करके असली कारण जानने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर कुछ बेसिक टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से थायराइड या एनीमिया की जांच के लिए 'ब्लड टेस्ट' और दिल की इलेक्ट्रिकल रफ्तार चेक करने के लिए 'ECG' कराने को बोल सकते हैं। इन जांचों की मदद से अगर आपको कोई परेशानी है तो इसका सही कारण का पता लगाकर समय रहते इसका सही उपचार किया जा सकता है।
Published on:
15 Mar 2026 03:22 pm
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