
प्रसव बाद निकल गया है पेट तो इन बातों का ध्यान रखें
कारणों को जानें
भोपाल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिराली रूनवाल के अनुसार प्रेग्नेंसी में ज्यादा फैटी फूड खाने, गर्भ में जुड़वा बच्चे होने और प्रसव बाद कम शारीरिक गतिविधि से भी पेट निकल आता है। लंबे समय की खांसी व कब्ज के कारण पेट संबंधी मांसपेशियां (रेक्टस एब्डोमिनस) जो दाएं व बाएं मौजूद होती हैं उनमें खिंचाव के कारण गैप आ जाता है। इसके अलावा कई दूसरे कारण जैसे आनुवांशिकता, कार्टिसोल और एस्ट्रोजन हार्मोन के अधिक स्रावित होने के कारण भी प्रसव बाद बेली फैट बढ़ जाता है।
ये परहेज करें
सामान्यत: प्रेग्नेंसी में महिला का वजन 9-10 किग्रा बढ़ना चाहिए। इस दौरान भी कई बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि 2-3 लीटर नियमित पानी पीएं। प्रसव के कुछ समय बाद हल्की एरोबिक एक्सरसाइज करें। इसमें सांस संबंधी गतिविधि जरूर करें। मीठी चीजों को खाने से बचें। आलू, चावल के बजाय ओट्स, गेहूं, दलिया, मंूग की दाल आदि खाएं। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर आंतों के मूवमेंट को बढ़ाता है। इससे पेट की अतिरिक्त चर्बी भी घटती है।
छह माह ब्रेस्टफीडिंग गर्भावस्था के दौरान एक्सपर्ट की सलाह से हफ्ते में तीन दिन 20 मिनट तक लो स्ट्रेन (धीमी गति में) कार्डियो एक्सरसाइज करें। छह माह तक बच्चे को स्तनपान कराएं। बेली फैट कम करने का यह नेचुरल तरीका है। इससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और उसका समुचित शारीरिक विकास होगा।
स्ट्रेच मार्क्स
प्रेग्नेंसी के दौरान त्वचा में प्रोटीन व विटामिन-ई की कमी से स्ट्रेच माक्र्स आते हैं। दाल, मूंगफली, चना, पनीर, अंडा, अंकुरित अनाज व मिक्स दालें प्रेग्नेंसी के दौरान व प्रसव बाद खाएं।
ये उपाय अपनाएं
नियमित व्यायाम व संतुलित खानपान से बैली फैट के साथ वजन कम कर सकते हैं। इसके बावजूद कम नहीं हो रहा है तो सपोर्ट के लिए बेली रैप प्रयोग कर सकते हैं।
Updated on:
10 Jan 2020, 1:28 PM IST
Published on:
10 Jan 2020, 1:28 PM IST
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