बच्चों में चिंता और डर को दूर करने के लिए अपनाएं ये मनोवैज्ञानिक समाधान

'हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग' ने ऐसे बच्चों की परवरिश की है जो कुछ बातों में पारंगत तो होते हैं लेकिन अकेले इसके दम पर वे वास्तविक दुनिया का सामना नहीं कर सकते। इसलिए बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना होगा जिसके लिए एक ग्रीष्मकालीन नौकरी खोजें या पार्टटाइम काम करें।

By: Mohmad Imran

Published: 07 Jul 2020, 01:54 PM IST

बच्चों की पैरेंटिंग को लेकर माता-पिता अक्सर दोराहे पर खड़े रहते हैं। उन्हें पूरी आजादी दें और नैसर्गिक रूप से बढऩे दें या उन पर पूरी निगरानी और नियंत्रण रखें ताकि वे इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में टिक सकें। अक्सर इस उलझन में माता-पिता बच्चों के लिए एक ऐसी दुनिया बना देते हैं जहां बच्चे न चाहते हुए भी माता-पिता की आकांक्षाओं का बोझ महसूस करने लगते हैं। यह बोझ धीरे-धीरे उनकी चिंता और फिर अवसाद बन जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि अभिभावक बच्चों की सही पैरेंटिंग के तौर-तरीकों में माहिर हो। कोलंबिया विश्वविद्यालय (Columbia University) में मनोवैज्ञानिक (Psychologist) ऐनी मैरी अल्बानो का सुझाव है कि जो मां-बाप अपने बच्चों के जीवन प्रबंधन (Life Managment) पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं, वह अक्सर बच्चों को और ज्यादा उलझन में डाल देता है। यह एक गंभीर विषय है जिसके केन्द्र में ही अनचाही चिंताओं का जन्म होता है। बच्चों को स्वयंउनकी परेशानियों से (शुरुआती स्तर पर) न जूझने देना उन्हें मानसिक रूपसे कमजोर बनाता है और सामान्य-सी कठिनाइयों का सामना होते ही वे टूट जाते हैं।

बच्चों में चिंता के गंभीर लक्षणों को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिकों का क्या सुझाव है?

बच्चों को उठाने दें जोखिम (Let's Kids Face Their Challange)
अल्बानो का शोध बच्चों और चिंता पर केन्द्रित है। अपने शोध में अल्बानों ने पाया कि जो बच्चे जोखिम नहीं उठाते या कभी-कभार ही उन्हें किसी परेशानी का सामना करना पड़ता है उनमें चिंता के लक्षण जल्दी उभरने की संभावना होती है। बच्चे माता-पिता की आकांक्षाओं का बोझ उठाए स्कूल-कॉलेज और फिर कॅरियर तक हर समय दौड़ते ही रहते हैं। क्या यही माता-पिता की असल जिम्मेदारी है या इस प्रवृत्ति को बदलने की जरुरत है। लेकिन यहां सवाल उठता है कि क्या बच्चों की रक्षा करना उनका सपोर्ट करना माता-पिता का कर्तव्य नहीं है? अल्बानो का कहना है कि बच्चों को मुश्किलों का सामना करने देने से पहले ही उन्हें सहारा देना गलत है। बच्चे की चिंता को समझना भर ही काफी नहीं है। माता-पिता की जिम्मेदारी इससे कहीं बढ़कर होती है।

बच्चों में चिंता के गंभीर लक्षणों को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिकों का क्या सुझाव है?

सीखने दें सबक जिंदगी का (Make Them Learn)
जब कोई बच्चा किसी कठिन दौर से गुजर रहा होता है तो माता-पिता अपने बच्चे की परेशानियों को बर्दाश्त नहीं कर पाते। वे उसकी मदद करने के लिए आगे आते हैं और हर संभव मदद करते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में बच्चा स्वयं अपनी मुश्किलों का सामना करने का हुनर नहीं सीख पाता। परिस्थितियों के साथ खुद को ढालना, स्वभाव में लचीलापन और जोखिम उठाने के साथ कठिन हालातों का सामना करने का कौशल विकसित करने का उन्हें मौका ही नहीं मिल पाता। बाद की जिंदगी में वे ऐसे कठिन हालात आने पर या तो पैरेंट्स को याद करते हैं या चिंता में दोहरे होने लगते हैं कि अब वे क्या करेंगे?

बच्चों में चिंता के गंभीर लक्षणों को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिकों का क्या सुझाव है?

डर का सामना करने में मदद करें (Be Their Support)
अल्बानो कहती हैं कि यदि माता-पिता अपने बच्चे के जीवन के डर का सामना करने में सहायता करें और समस्या को हल करने का तरीका बताएं बिना उसका हिस्सा बनें तो इस बात की अधिक संभावना है कि बच्चे अपनी परेशानियों का स्वयं हल निकालने का गुर सीख जाएंगे। जब कभी ऐसे हालात सामने आएं तो माता-पिता को शांत रहते हुए बच्चे की भावनाओं को सुनना चाहिए। पूरी बात जानने के बाद बच्चों की योजना बनाने में मदद करें कि स्थिति का सामना कैसे करें? अल्बानो सलाह देती हें कि इसके बाद उन्हें अपने स्तर पर उनकी मुश्किलों का सामना करने दें। आप हैरान रह जाएंगे जब बच्चे अपनी परेशानियों का खुद हल निकालेंगे क्योंकि तब वे अनुभव से सीखने का हुनर जान जाएंगे।

बच्चों में चिंता के गंभीर लक्षणों को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिकों का क्या सुझाव है?

हालांकि सभी मामलों में ऐसा करना संभव नहीं लेकिन बच्चों में आत्मविश्वास जगाना बहुत सी समस्याओं का समाधान कर सकता है। अल्बानो ने जोर देकर कहा कि यह रणनीति केवल हर मुसीबत में माता-पिता का मुंह तकने वाले बच्चों की आंतरिक कुंठाओं में ही काम करती है, बलुीइंग जैसी स्थितियों में नहीं। लेकिन इससे आप अपने बच्चों को सजग और होशियार बना सकते हैं।

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