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मिसकैरेज की हैं ये 5 बड़ी वजहें, प्रेग्नेंट होते इन बातों का जरूर रखें ध्यान

Reasons for miscarriage right after pregnancy-प्रग्नेंसी के ठीक बाद या कुछ महीने में मिसकैरिज की संभावनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। प्रेग्नेंसी के तीन महीने और छठवें से 7वें महीने के बीच भी मिसकैरिज का खतरा ज्यादा होता है। अगर आप मिसकैरिज की समस्या से जूझ रहीं, या प्रेग्नेंट हैं तो आपको यह जानना जरूरी है कि किन कारणों से मिसकैरिज सबसे ज्यादा होते हैं।एक स्वस्थ बच्चे को पैदा करने के लिए मां का बीमारी रहित और स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। ठीक उसी तरह जैसे अगर खेत उपजाऊ न हो तो फसल भी अच्छी नहीं होती या पौधे पनप नहीं पाते। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कुछ बीमारियां मिसकैरिज के लिए जिम्मेदार होती हैं।

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Ritu Singh

Mar 04, 2022

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मिसकैरेज की हैं ये 5 बड़ी वजहें

प्रग्नेंसी एक मां के लिए सबसे सुखद होती है, लेकिन अगर प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ खास बीमारियों और लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो यह मिसकैरिज में बदल सकती है। कई बार महिलाओं को लगातार मिसकैरिज का सामना करना पड़ता है और इसके पीछे एक नहीं कई वजह शामिल होती हैं। लेकिन मिसकैरिज को रोका जा सकता है, अगर समय रहते समस्याओं पर ध्यान दिया जाए। तो चलिए आपको बताएं कि मिसकैरिज के लिए क्या-क्या कारण जिम्मेदार होते हैं।

थायरॉयड : मिसकैरिज या मानिसक रूप से बीमार बच्चे के पीछे थायरॉयड सबसे बड़ा कारण होता है। महिलाओं का थायरॉयड हार्मोन अक्सर ही खराब रहता है। अगर आप थायरॉड पेशेंट हैं तो प्रग्नेंसी में आपको बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि इस हार्मोन के डिसबैलेंस से मिसकैरिज का खतरा बना रहता है। थायरॉयड के साथ हुई प्रेगनेंसी में आपको डॉक्टर की निगरानी में रहना जरूरी है।
डायबिटीज : प्रेग्नेंसी में कई बारजेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। कई बार अचानक से ब्लड शुगर गड़बड़ हो जाता है और इससे मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा डायबिटीज की वजह से बच्चे में भी कई जन्मजात बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।

क्रोमोसोमल असामान्यता : फर्टिलाइजेशन के दौरान स्पर्म और एग दोनों एक परफेक्ट मैच बनाने के लिए 23 क्रोमोसोम इकट्ठे करते हैं। ये एक जटिल प्रक्रिया होती है और अगर इसमें जरा सी गड़बड़ हो जाए तो क्रोमोसोमल असमान्यता पैदा कर सकती है और इस वजह से भी मिसकैरेज हो सकता है।
हार्मोनल असंतुन : प्रेग्नेंसी से पहले अगर हार्मोनल दिक्कत रही हो तो इससे भी मिसकैरिज का खतरा होता है। अधिक प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन नहीं बन पाने से यूट्रस की लाइनिंग कमजोर होती है। इससे मिसकैरेज के चांसेज बढ़ जाते हैं। लेकिन इसे हार्मोनल दवाओं के जरिये रोका जा सकता है।

फाइब्रायड्स : यूटरेस में अगर फाइब्रॉयड, यूटरिन डिफेक्ट या ऑटो इम्यून डिसऑर्डर हो तो भी गर्भ ठहरने के बाद भी मिसकैरिज हो जाता है।
नोट -याद रखें ये सारे ही खतरे क्योरेबल हैं, बस डॉक्टर के संपर्क में रहने की जरूरत होती है।
(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह जरूर लें। । किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)