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खारे पानी से त्वचा को होता है नुकसान, जानें अन्य खास बातें

न्यूट्रीशनिस्ट स्वस्थ व चमकदार त्वचा के लिए नियमित खुबानी खाने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक इसमें ऐसे तत्त्व हैं जो त्वचा को पोषण और ताजगी देते हैं।

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Vikas Gupta

Sep 27, 2017

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न्यूट्रीशनिस्ट स्वस्थ व चमकदार त्वचा के लिए नियमित खुबानी खाने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक इसमें ऐसे तत्त्व हैं जो त्वचा को पोषण और ताजगी देते हैं।

भारी जल यानी खारा पानी त्वचा को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। किंग्स कॉलेज लंदन में हुए एक शोध के अनुसार, खारे पानी में काफी मात्रा में कैल्शियम और मैग्नीशियम मौजूद होता है। इस कारण स्किन की जरूरी नमी खोने के कारण बाहरी लेयर प्रभावित होती है और बैक्टीरियल इंफेक्शन व सनबर्न की शिकायत के साथ एक्जिमा का खतरा भी अधिक हो जाता है।

स्किन के लिए खाएं खुबानी
न्यूट्रीशनिस्ट स्वस्थ व चमकदार त्वचा के लिए नियमित खुबानी खाने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक इसमें ऐसे तत्त्व हैं जो त्वचा को पोषण और ताजगी देते हैं। इसमें ऐसा खास तेल भी मौजूद है जो त्वचा की कोशिकाओं का पुनर्निर्माण करता है। यह तेल हल्का होता है साथ ही इसमें चिकनाई नहीं होती। ऐसे में इसे खाना फायदेमंद है। अमरीकी यूनिवर्सिटी के अनुसार मौसम के अनुसार इसे रोजाना खाया जा सकता है। इसमें मौजूद विटामिन-ए और ई स्किन में नमी बनाए रखते है।


खुबानी में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के,विटामिन ई और नियासिन की महत्वपूर्ण मात्रा होती है। विटामिन्स की सामग्री के साथ-साथ इसमें खनिज सामग्री भी होती है जैसे पोटेशियम कॉपर, मैंगनीज,मैग्नीशियम और फास्फोरस। खुबानी आहार फाइबर (Dietary Fiber)का बहुत अच्छा स्रोत हैं। इसे विभिन्न कॉस्मेटिक्स में उपयोग किया जाता है। खुबानी को ताज़ा ही नहीं बल्कि सूखे मेवे की एक किस्म के रूप में खाया जा सकता है। यह विभिन्न रस, जैम और जैली बनाने में भी प्रयोग किया जाता है। खुबानी तेल को इसके कर्नेल से भी प्राप्त किया जा सकता है।

अच्छी यादें करती मूड फ्रेश
साइकोलॉजी टुडे जर्नल के अनुसार डिप्रेशन, बेचैनी, गुस्सा व तनाव आदि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को रोज कम से कम 20 मिनट तक अपने जीवन के उन लम्हों को याद करना चाहिए जिन्हें वे खुशनुमा मानते हैं। लोयोला यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसा करने से व्यक्ति का मूड फ्रेश रहता है और वह मानसिक शांति भी महसूस करता है। यूनिवर्सिटी की रिसर्चर सोंजा ल्यूबोमिस्र्की ने कहा कि सकारात्मक गतिविधि, सोच और पल में जादुई ताकत होती है।

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