
हमारे दांतों के भीतर महीन नलिकाएं होती हैं, इन्हें डेंटीनल ट्यूबूल्स कहते हैं। इन नलिकाओं में दर्द, ठंडा-गर्म महसूस करने के लिए तंत्रिकाएं होती हैं। जब दांत की बाहरी परत घिस कर हट जाती है, तो दांतों में झनझनाहट होने लगती है।
हमारे दांतों के भीतर महीन नलिकाएं होती हैं, इन्हें डेंटीनल ट्यूबूल्स कहते हैं। इन नलिकाओं में दर्द, ठंडा-गर्म महसूस करने के लिए तंत्रिकाएं होती हैं। जब दांत की बाहरी परत घिस कर हट जाती है, तो दांतों में झनझनाहट होने लगती है। एंटी सेंसेटिव टूथपेस्ट या तो इन तंत्रिकाओं को सुन्न करते हैं या फिर नलिकाओं को भरकर जाम कर देते हैं, जिससे कि उनमें झनझनाहट खत्म हो जाती है। जानते हैं कि ये कितने प्रकार के होते हैं और इनमें किसके लिए कौनसा कारगर हो सकता है।
सेंसेटिविटी टूथपेस्ट के प्रकार
मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं इनमें-पोटेशियम नाइट्रेट, स्ट्रोंशियम क्लोराइड, आर्जिनाइन, नोवामिन या बायोमिन टूथपेस्ट। अलग-अलग अध्ययन बताते हैं कि आर्जिनाइन, नोवामिन व बायोमिन टूथपेस्ट नए और ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं।
जरूरत होने पर क्या करें
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. आनन्द नागोरी बताते हैं कि अक्सर देखा जाता है कि रोगी विज्ञापन देखकर कोई भी सेंसिटिविटी वाला टूथपेस्ट ले लेता है लेकिन उसका असर नहीं होता है। परेशानी वैसे ही रहती है। ऐसे में कोशिश करें कि एक बार डॉक्टर को दिखा लेंगे तो सही कारण और इलाज के बारे में उचित जानकारी मिल जाएगी।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
02 Dec 2023 03:01 pm
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