
एक अध्ययन के अनुसार नींद की कमी न केवल हमें थका देती है, बल्कि हमारी भावनात्मक कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकती है, सकारात्मक मूड में कमी ला सकती है और हमें चिंता के लक्षणों के लिए अधिक जोखिम में डाल सकती है। साइकोलॉजिकल बुलेटिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में नींद की कमी और मनोदशा पर 50 से अधिक वर्षों के शोधों से यह निष्कर्ष निकाला है। निष्कर्षों से पता चला है कि 30 प्रतिशत से अधिक वयस्कों और 90 प्रतिशत तक किशोरों को पर्याप्त नींद नहीं मिलती है।
5,715 प्रतिभागी थे शामिल
यह अध्ययन इस बात का पुख्ता सबूत देता है कि लंबे समय तक जागना, नींद की अवधि कम होना और रात में जागना हृयूमन की भावनात्मक कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। टीम ने पांच दशकों के 154 अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें कुल 5,715 प्रतिभागी शामिल थे। उन सभी अध्ययनों में, शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की नींद को एक या अधिक रातों के लिए बाधित किया। कुछ प्रयोगों में, प्रतिभागियों को लंबे समय तक जगाए रखा गया।
नींद की कमी के प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि नींद की हानि से खुशी, प्रसन्नता और संतुष्टि जैसी सकारात्मक भावनाओं में कमी हुई है। साथ ही तेजी से हृदय गति में वृद्धि हुई। साथ ही अवसाद की स्थिति का भी पता चला। अध्ययन में अधिकांश प्रतिभागी युवा वयस्क थे।
Published on:
22 Dec 2023 01:43 pm
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