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रात भर AC चलाकर सोने वाले लोग पढ़ लें ये खबर, शरीर के इन 3 अंगों को हो सकता है परमानेंट नुकसान

Side Effects of AC on Bones and Joints: क्या आप भी रात भर AC में सोते हैं? जानें कैसे ठंडी हवा आपकी आंखों, जोड़ों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है और इससे बचने के लिए AC का सही तापमान क्या होना चाहिए।

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भारत

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Dimple Yadav

Apr 23, 2026

Side Effects of Sleeping in AC

Side Effects of Sleeping in AC (Photo- gmeini ai)

Ac me Sone ke Nuksan: तपती गर्मी से राहत पाने के लिए रात भर एयर कंडीशनर (AC) चलाकर सोना आज के दौर में लग्जरी नहीं बल्कि मजबूरी बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ठंडी हवा में आप चैन की नींद सो रहे हैं, वह आपके कंकाल तंत्र (Skeletal System) यानी हड्डियों को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है? हालिया मेडिकल रिसर्च और विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक AC के सीधे संपर्क में रहने से हड्डियों और जोड़ों में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

हड्डियों पर कैसे वार करता है AC?

National Institutes of Health की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब हमारा शरीर लंबे समय तक कृत्रिम ठंडे तापमान में रहता है, तो शरीर में रक्त का संचार (Blood Circulation) धीमा हो जाता है। ठंडी हवा के कारण हमारी मांसपेशियां और टेंडन्स (Tendons) सिकुड़ने लगते हैं, जिससे जोड़ों में कड़ापन (Stiffness) बढ़ जाता है। इसे ही मेडिकल की भाषा में 'कोल्ड-इंड्यूस्ड मस्कुलोस्केलेटल पेन' कहा जाता है।

क्यों बढ़ जाता है गठिया और कमर दर्द?

जयपुर के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Surgeon) डॉ. राजेश शर्मा बताते हैं कि AC की हवा प्राकृतिक नहीं होती और यह हवा की नमी (Humidity) को पूरी तरह सोख लेती है। डॉ. राजेश शर्मा के मुताबिक "जब आप रात भर 20 डिग्री या उससे कम तापमान पर सोते हैं, तो जोड़ों के बीच मौजूद 'साइनोवियल फ्लूइड' (Synovial Fluid), जो लुब्रिकेंट का काम करता है, गाढ़ा होने लगता है। इससे जोड़ों में घर्षण बढ़ता है और सुबह उठते ही शरीर में अकड़न, पीठ दर्द और गर्दन में खिंचाव महसूस होता है। लंबे समय में यह आदत ऑस्टियोआर्थराइटिस और फ्रोजन शोल्डर जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।"

AC में सोने के 3 सबसे घातक 'बोन' साइड इफेक्ट्स (AC me rahne ke nuksan)

मसल्स क्रैम्प्स (Muscle Cramps): अचानक ठंडी हवा के संपर्क में आने से मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है, जो नींद के दौरान हड्डियों पर अनावश्यक दबाव डालती है।

विटामिन-D की कमी का जोखिम: AC में रहने वाले लोग अक्सर धूप से दूर रहते हैं, जिससे हड्डियों के लिए सबसे जरूरी विटामिन-D की कमी हो जाती है।

पुरानी चोट का उभरना: अगर आपको कभी फ्रैक्चर या लिगामेंट इंजरी हुई है, तो AC की ठंडी हवा उस पुरानी चोट के हिस्से में 'क्रोनिक पेन' को दोबारा शुरू कर सकती है।

फेफड़ों पर AC का प्रहार

हड्डियों के साथ-साथ AC आपके फेफड़ों के लिए भी चुनौती खड़ा कर सकता है। 'ब्रीद क्लिनिक' की एक हालिया रिपोर्ट और पल्मोनरी रिसर्च के अनुसार, AC की ठंडी हवा फेफड़ों की नलियों (Airways) को सिकोड़ देती है, जिसे 'Bronchoconstriction' कहा जाता है। यह स्थिति अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए जानलेवा हो सकती है। रिसर्च बताती है कि AC के फिल्टर में पनपने वाले बैक्टीरिया और मोल्ड (Mold) हवा के जरिए फेफड़ों में जाकर 'हाइपरसेंसिटिविटी निमोनिया' का कारण बनते हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि बिना सर्विसिंग वाले AC में सांस लेना फेफड़ों के टिश्यू को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

AC की हवा का 'Dry Eye' कनेक्शन

हड्डियों और फेफड़ों के अलावा, AC का सबसे पहला असर आपकी आंखों पर पड़ता है। 'The Eye Foundation' की एक रिसर्च के अनुसार, एयर कंडीशनर कमरे की हवा से नमी (Humidity) को पूरी तरह सोखी लेता है, जिससे आंखों की सुरक्षा करने वाली 'टियर फिल्म' (Tear Film) तेजी से सूखने लगती है। मेडिकल भाषा में इसे 'Evaporative Dry Eye Syndrome' कहा जाता है। रिसर्च बताती है कि जो लोग रात भर सीधे AC की हवा में सोते हैं, उनमें आंखों में जलन, लालिमा और धुंधलेपन की समस्या 30% ज्यादा देखी गई है। डॉक्टरों की सलाह है कि आंखों के परमानेंट डैमेज से बचने के लिए AC की हवा का रुख चेहरे की तरफ न रखें।

क्या करें? बचाव के 4 आसान उपाय

अगर आप AC के बिना नहीं रह सकते, तो डॉ. शर्मा ये सुझाव देते हैं:

तापमान सेट करें: AC को कभी भी 16 या 18 पर न चलाएं। 24°C से 26°C का तापमान मानव हड्डियों के लिए सुरक्षित माना जाता है।

डायरेक्ट हवा से बचें: ध्यान रखें कि AC की स्विंग सीधे आपके जोड़ों (घुटनों या कंधों) पर न पड़े।

स्ट्रेचिंग है जरूरी: सुबह उठते ही हल्के गर्म पानी से नहाएं और 5 मिनट स्ट्रेचिंग करें ताकि जोड़ों की अकड़न खत्म हो सके।

हाइड्रेशन: शरीर में नमी बनाए रखने के लिए भरपूर पानी पिएं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।