16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दूषित पदार्थ बाहर निकाल शरीर का शोधन करती मिट्टी

हमारे शरीर का निर्माण पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पंच तत्वों से हुआ है। इनमें से पृथ्वी तत्व काफी महत्वपूर्ण है।

3 min read
Google source verification
दूषित पदार्थ बाहर निकाल शरीर का शोधन करती मिट्टी

दूषित पदार्थ बाहर निकाल शरीर का शोधन करती मिट्टी

हमारे शरीर का निर्माण पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पंच तत्वों से हुआ है। इनमें से पृथ्वी तत्व काफी महत्वपूर्ण है। यह न केवल मनुष्य का पालन-पोषण, वृद्धि और विकास करती है बल्कि विभिन्न पेड़, पौधों, वनस्पतियों, जड़ी- बूटियों और खाद्यानों को भी जन्म देती है जो मनुष्य के पालन-पोषण में सहायक होते हैं। इसलिए इसे माता कहा जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी से शारीरिक एवं मानसिक विकारों को दूर किया जाता है।
बदलती जीवनशैली में हो रहे नकारात्मक बदलावों से शारीरिक व मानसिक विकारों की वृद्धि हो रही है। इससे सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, पेट के रोग, हृदय रोग, अनिद्रा, तनाव जन्म विकारों, त्वचा रोगों तथा अन्य रोगों का उपचार मिट्टी चिकित्सा से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। लेकिन इसके साथ आहार-विहार और व्यवहार का भी ध्यान रखना चाहिए। मिट्टी का लेप न केवल शरीर को बाहर से सुंदर और स्वस्थ बनाता है बल्कि मन की गंदगी को भी दूर कर उसे स्वस्थ और सुंदर बनाने में अपना योगदान देता है।
पूरे शरीर पर मिट्टी का लेप करते समय ध्यान रखें कि लेप एक जैसा रहे। मिट्टी में विजातीय पदार्थों (विष) को अपने में आत्मसात करने का गुण होता है। शरीर के दूषित पदार्थ रोमछिद्रों से मिट्टी में मिल जाते हैं। इसका उपयोग चर्म रोगों एवं स्नायु विकारों में अधिक करते हैं।
ऐसे करें मिट्टी का उपयोग
मिट्टी की पट्टी बनाने के लिए मिट्टी को सबसे पहले कूटने के बाद छाना जाता है। इसके बाद उसमें जरूरत के अनुसार पानी मिलाएंं। फिर किसी लकड़ी की मदद से गुंथे आटे की तरह बना लें। ध्यान रखें कि मिट्टी अधिक ढीली न हो। इसके बाद साफ कपड़े के टुकड़े पर मिट्टी रखकर उसे लकड़ी की मदद से फैलाएं। पट्टी की मोटाई आधा इंच वचौड़ाई 9-10 इंच होनी चाहिए।
प्रयोग : पेडू पर 20-30 मिनट के लिए इस तरह पट्टी रखें कि मिट्टी पेडू की त्वचा के संपर्क में रहे। 12-14 घंटे तक भीगी हुई मिट्टी काम में लेते हैं। पेडू पर यह पट्टी सुबह खाली पेट या भोजन के 5-6 घंटे बाद रखें। पट्टी लगाने के 1-2 घंटे बाद ही कुछ खाएं। सर्दियों में इस पट्टी को रखने के बाद उसपर ऊपर से ऊनी कपड़ा अवश्य लपेटें। माथे पर और आंखों को बंद कर मिट्टी की पट्टी कुछ देर के लिए रखने से राहत मिलती है। बवासीर की समस्या में मिट्टी का गोला बनाकर उसपर बैठें या सोते समय गुदा द्वार पर मिट्टी की लोई का प्रयोग करें। त्वचा रोगों में भी यह पट्टी मददगार है। विशेषज्ञ की सलाह के बाद लगाने से अधिक लाभ मिलता है।
ये रखें ध्यान

ध्यान रखने वाली बात यह है कि मिट्टी हमेशा साफ-सुथरी जगह से या नदी के तले से और 4 से 5 फीट नीचे से ली जाए। उसमें कंकड़, पत्थर, घास-फूस, दवा का छिडक़ाव, रासायनिक खाद, प्लास्टिक या अन्य कोई गंदगी न हो। मिट्टी को सूखाने के बाद प्रयोग में लेते हैं। एक बार इस्तेमाल की गई मिट्टी को दोबारा प्रयोग में न लें। अगर मिट्टी चिपकने वाली है तो उसमें थोड़ी बालू मिट्टी मिल लें। इसके बाद ही प्रयोग में लें
नंगे पैर चलने के लाभ
नंगे पैर मिट्टी पर चलने से पैर मजबूत, स्वस्थ, सुडौल व रक्त संचार बेहतर होता है। पैरों से दुर्गन्ध निकल जाती व एडिय़ां नहीं फटती हैं। नेत्र ज्योति बढ़ती, पाचन ठीक होता, ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, गले की सूजन, जुकाम आदि में आराम।
किस बीमारी में कैसे इस्तेमाल
मिट्टी की चिकित्सा मुख्य रूप से पेडू की पट्टी, आंख की पट्टी, माथे की पट्टी तथा सारे शरीर पर मिट्टी का लेप करके की जाती है। पाचन तंत्र के रोगों के लिए पेडू की पट्टी सर्वाधिक उपयोगी है।
आंख व सिर की पट्टी
सिर की ओर रक्त का संचार अधिक होने से सिरदर्द हो सकता है। इसमें मिट्टी की पट्टी लाभ पहुंचाती है। बालों में रूसी, स्नायु विकार एवं अन्य चर्म रोगों में सिर पर मिट्टी का लेप करें।
रज स्नान
शुद्ध साफ मिट्टी को कपड़े से छानकर पूरे शरीर पर रगडकऱ 10-20 मिनट धूप में बैठें इससे त्वचा नरम, लचीली होती है। रोमछिद्र खुलते और टॉक्सिक तत्व पसीने के साथ बाहर निकलते हैं।
गीली मिट्टी स्नान
बारीक पिसी मिट्टी को पानी मिलाकर लेई बना लें फिर उसका पूरे शरीर पर लेपन करें। इसके बाद धूप में बैठ जाएं। सूखने के बाद धीरे से हटाएं। इससे पूरे शरीर का शोधन होता है।
सावधानियां
मिट्टी की अशुद्धता-गंदगी हो सकती है। उसे किसी बर्तन में गर्म कर ठंडा होने के बाद इस्तेमाल में लें।
मलेरिया के ज्वर में, दमा के दौरे में एवं दिल का दौरा पडऩे पर पेडू पर मिट्टी पट्टी का प्रयोग न करें।
मिट्टी पट्टी बनाने के लिए मिट्टी को 10-12 घंटे पहले पानी में भिगोएं।
भिगोई गई मिट्टी का उपयोग चार-पांच दिनों में कर लेना चाहिए।
मिट्टी की लुग्दी बनाते समय उसमें हाथ नहीं डालना चाहिए बल्कि किसी लकड़ी या चम्मच से चलाएं।


बड़ी खबरें

View All

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल