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Thermal Shock in Teeth: धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना दांतों के लिए हो सकता है नुकसानदायक, डेंटिस्ट से समझें थर्मल शॉक का सच

Craze Lines on Teeth: क्या धूप से लौटकर तुरंत बर्फ का पानी पीना दांतों को बीच से फाड़ सकता है? सीनियर डेंटिस्ट डॉ. नितिन गुप्ता से जानिए दांतों में थर्मल शॉक का विज्ञान और इससे बचने के आसान तरीके।

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भारत

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Dimple Yadav

May 29, 2026

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दांतों के दर्द से परेशान लड़के की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- Freepik)

Thermal Shock Teeth Damage: बाहर की झुलसाती गर्मी से आते ही जब आप बर्फ का पानी पीते हैं, तो वह सीधे आपके दांतों पर थर्मल अटैक करता है। मेडिकल साइंस में इसे थर्मल शॉक (Thermal Shock) कहा जाता है। सीनियर डेंटिस्ट डॉ. नितिन गुप्ता से जानिए कि तापमान का यह अचानक बदलाव आपके दांतों को अंदर से कैसे डैमेज करता है।

दांत फटने की असली वजह

हमारे दांत दिखने में भले ही पत्थर जैसे सख्त लगें, लेकिन इनकी बनावट दो अलग-अलग परतों से मिलकर बनी है:

इनेमल (Enamel): दांत की सबसे बाहरी और मानव शरीर की सबसे कठोर सफेद परत।

डेंटिन (Dentin): इनेमल के ठीक नीचे मौजूद थोड़ी नरम और बेहद संवेदनशील परत।

जब आप कड़कड़ाती धूप में होते हैं, तो थर्मल एक्सपेंशन (Thermal Expansion) के कारण आपके दांतों का इनेमल थोड़ा फैलता है। लेकिन जैसे ही आप तुरंत फ्रिज का ठंडा पानी पीते हैं, तापमान तेजी से गिरता है।

बाहरी परत (इनेमल) ठंड के संपर्क में आकर तुरंत सिकुड़ने (Contract) की कोशिश करती है, जबकि अंदरूनी परत (डेंटिन) इतनी जल्दी अपना तापमान नहीं बदल पाती। दोनों परतों के बीच पैदा होने वाले इसी थर्मल मिसमैच के कारण दांत की सतह पर एक भयानक दबाव बनता है, जिससे इनेमल में बारीक दरारें आ जाती हैं। इन्हें डेंटिस्ट्री में क्रैज लाइन्स (Craze Lines) कहते हैं।

डेंटिस्ट के मुताबिक इसके 3 सबसे बड़े खतरे

डॉ. नितिन गुप्ता के अनुसार, बार-बार यह गलती दोहराने से आपके दांतों को यह गंभीर नुकसान पहुंच सकता है:

क्रोनिक सेंसिटिविटी: जब इनेमल की दरारें गहरी होकर डेंटिन तक पहुंचती हैं, तो दांतों की नसें सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में आ जाती हैं। इसके बाद कुछ भी सामान्य ठंडा या गर्म खाने-पीने पर तेज झनझनाहट होने लगती है।

वर्टिकल टूथ फ्रैक्चर: कई गंभीर मामलों में यह आंतरिक दबाव इतना बढ़ जाता है कि दांत बीच में से वर्टिकली (खड़े रूप में) दो हिस्सों में फट जाता है। ऐसी स्थिति में रूट कैनाल (RCT) भी काम नहीं आता और दांत को निकालना ही पड़ता है।

अंदरूनी इन्फेक्शन (पल्प डैमेज): इन बारीक दरारों में बैक्टीरिया और बारीक फूड पार्टिकल्स फंसने लगते हैं, जो धीरे-धीरे दांत की नसों (Pulp) तक पहुंचकर इन्फेक्शन पैदा कर देते हैं।

बचाव के डेंटिस्ट टिप्स

धूप से आने के बाद कम से कम 15 मिनट बैठें ताकि ओरल कैविटी (मुंह के अंदर) का तापमान नॉर्मल हो सके। अगर प्यास बर्दाश्त नहीं हो रही, तो पहले सामान्य पानी से कुल्ला करें। इससे मुंह का तापमान बैलेंस हो जाएगा। फ्रिज के चिल्ड वाटर के बजाय घड़े के पानी का इस्तेमाल करें, जो दांतों की सेहत के लिहाज से सबसे सुरक्षित है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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