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पैरों की सूजन दूर करने में मददगार हो सकते हैं ये योगासन

किडनी या हृदय संबंधी रोगों, शरीर में बेहतर रक्तसंचार न होने, एक ही जगह लंबे समय तक बैठे रहने, टाइट जूते पहनने या अधिक वजनउठाने से भी यह दिक्कत होती है

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Vikas Gupta

Oct 02, 2017

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किडनी या हृदय संबंधी रोगों, शरीर में बेहतर रक्तसंचार न होने, एक ही जगह लंबे समय तक बैठे रहने, टाइट जूते पहनने या अधिक वजनउठाने से भी यह दिक्कत होती है

पैरों में सूजन की समस्या सिर्फ बुजुर्गों या प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में ही नहीं वयस्कों में भी देखी जाती है। किडनी या हृदय संबंधी रोगों, शरीर में बेहतर रक्तसंचार न होने, एक ही जगह लंबे समय तक बैठे रहने, टाइट जूते पहनने या अधिक वजनउठाने से भी यह दिक्कत होती है। इन आसनों का अभ्यास कर सकते हैं।

वीरभद्रासन
सीधे खड़े होकर दोनों पैरों के बीच ३-४ फुट का गैप दें। दाएं पैर को हल्का सा घुटने से मोड़कर दाईं आेर लाएं व बाएं पैर को सीधा कर तलवा जमीन से लगाएं। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर लाएं। सामान्य सांस लेते हुए इस अवस्था में रुककर सांस छोड़ते हुए शुरुआती स्थिति में आएं। बाएं पैर से भी दोहराएं। इसकी दूसरी विधि में पैरों की स्थिति समान होगी सिर्फ हाथ ऊपर के बजाय कंधे के बराबर होंगे। तीसरी विधि में दोनों पैरों पर खड़े होकर कमर से ऊपरी भाग को सामने ९० डिग्री की स्थिति में लाएं। दोनों हाथों को कान से छूते हुए सामने रखें। बाएं पैर को उठाकर ऊपरी भाग के बराबर लाएं।
ध्यान रखें: जिनका हाल ही कोई ऑपरेशन हुआ हो या किसी प्रकार की चोट लगी हो तो उस अंग पर दबाव न पडऩे दें।

कटिचक्रासन
सीधे खड़े होकर पैरों के बीच डेढ़ फुट की दूरी बनाएं। कंधों की सीध में दोनों हाथों को सामानांतर फैलाएं। इसके बाद दाएं हाथ को बाएं हाथ के कंधे पर रखें व बाएं हाथ को पीछे से दाईं ओर ले जाकर शरीर से स्पर्श करें। सामान्य सांस लेते हुए मुंह घुमाकर बाएं कंधे के बराबर ले आएं। १०-१५ सेकंड इस स्थिति में खड़े रहने के बाद दाईं ओर से भी इसे दोहराएं। इस क्रिया को दोनों हाथों से ५-५ बार करें। इस आसन को करते समय कमर से ऊपरी शरीर को पीछे की ओर घुमाते समय घुटने न मोड़ें व पैरों को अपनी जगह से न हिलाएं। एक समय में ऐसा ३-४ बार करें।
ध्यान रखें: जल्दबाजी में इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए। वर्ना संतुलन बिगडऩे से चोट लग सकती है। चक्कर आएं तो भी इसे न करें। घायल हो सकते हैं।
अश्व संचालन
घुटनों के बल बैठते हुए कुल्हों से ऊपर का शरीर सीधा रखें। अब पहले दाएं पैर को पंजे के बल आगे रखें। इस दौरान बायां पैर पहली जैसी स्थिति में रहेगा। ध्यान रखें कि दायां पैर का घुटना और टकना एक सीध में होना चाहिए। फिर हाथों की अंगुलियों को पंजे के आसपास रखकर आसमान की ओर या सामने की तरफ देखने का प्रयास करें। ध्यान रखें कि इस दौरान सीना दाएं पैर की जांघ छुएगा और दोनों पैरों के घुटने एक सीध में होंगे। कुछ देर इस अवस्था में रुकने के बाद प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं। बाएं पैर से भी दोहराएं।
ध्यान रखें:
जिन्हें पैर या कूल्हे में कोई चोट लगी हो वे इसका अभ्यास करने से बचें।