
यूनानी चिकित्सा पद्धति में न्यूरो मस्क्यूलर डिसऑर्डर जैसे जोड़ों का दर्द, कमरदर्द, स्लिप डिस्क, कंधे का दर्द, सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस व आर्थराइटिस का इलाज तीन तरह से किया जाता है। पहला, इलाज-बिल-गिजा (डायटोथैरेपी)। दूसरा, इलाज-बिल-दवा(फार्माकोथैरेपी)। तीसरी, इलाज-बिल-तदबीर (रेजिमेंटल थैरेपी)।

इस पद्धति से इलाज के दौरान तला-भुना, खट्टा, जिन्हें खाने से पेट में गैस बने, मिर्च-मसाले, चाय, कोल्ड ड्रिंक आदि से परहेज करना चाहिए क्योंकि इनसे नसों का दर्द और सूजन बढ़ सकती है। अपने विशेषज्ञ की सलाह से कैल्शियम और विटामिन डी-3 के सप्लीमेंट जैसे केला, शतावरी, दूध, गाय का देसी घी आदि को आहार में शामिल करें।

डायटोथैरेपी: इसमें विशेषज्ञ मरीज को एक डाइट चार्ट फॉलो करने के लिए कहते हैं।

फार्माकोथैरेपी: इसमें यूनानी हर्बल दवाओं से शरीर में होने वाले दर्द व सूजन को कम किया जाता है।

रेजिमेंटल थैरेपी: इसमें मसाज, कपिंग थैरेपी और स्टीम की सहायता से उपचार किया जाता है।