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WHY COVAXIN : महंगी, बिना क्लिनिकल ट्रायल डाटा के ही कोवैक्सीन का क्यों टीकाकरण शुरू!

डीसीजीआइ ने पहले 'बैकअप' बताकर दी मंजूरी अब सीधी लोगों को लगाई जा रही है वैक्सीन 900 रुपए में कोवैक्सीन व कोविशील्ड 200 की 55 लाख खुराक कोवैक्सीन की डोज का ऑर्डर भारत बायोटेक कंपनी व आइसीएमआर बना रही

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नई दिल्ली. कोरोना का टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है। इसको लेकर औषध महानियंत्रक यानी डीसीजीआई ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड व भारत बायोटेक के स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को मंजूरी के बाद टीकाकरण शुरू हो रहा है। शुरू से ही विवादों में रही कोवैक्सीन को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि महंगी होने के अलावा वैक्सीन को 'बैकअप' (BACKUP VACCINE) के रूप में प्रयोग की मंजूरी थी तो इसका सीधे टीकाकरण में शामिल क्यों किया जा रहा है? ऐसे में फ्रंटलाइन वॉरियर्स के पास विकल्प नहीं कि कौन सी वैक्सीन लगवाएंगे?

डीसीजीआई डॉ. वीजी सोमानी (DCGI DR. V G SOMANI) ने कोवैक्सीन को मंजूरी देने के बाद कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जिन लोगों को टीके लगाए जाएंगे, उन्हें क्लीनिकल ट्रायल का हिस्सा माना जाएगा। ऐसे में सवाल है कि क्या कंसेंट फॉर्म में इसका विस्तृत विवरण होगा? क्या कोई नियंत्रण समूह होगा? इस ट्रायल के डेटा का उपयोग कहां किया जाएगा? वे अधिकार जो सामान्य तौर पर किसी क्लीनिकल ट्रायल के वॉलंटियर को मिलते हैं, क्या वही अधिकार कोवैक्सीन लगवाने वाले लोगों को मिलेंगे?

कितनी सुरक्षित व प्रभावशाली (HOW MUCH SECURE COVAXIN VACCINE)
भारत बायोटेक के दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के डाटा रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में कैसे यह तय कर लिया गया कि कोवैक्सीन सुरक्षित व प्रभावशाली (SECURITY AND EFFICASY RATE )है? दूसरी ओर भारत बायोटेक ने भी कहा था कि उम्मी है कि कोवैक्सीन 60 फीसदी प्रभावशाली होगी। इसका क्या आधार है।
महंगी...प्रभावशीलता का पता नहीं (COVAXIN IS COSTLY)
कोवैक्सीन की कीमत करीब 900 रुपए होगी। दूसरी ओर इसके क्लिनिकल ट्रायल का डाटा नहीं आया है। इस वजह से इसकी प्रभावशीलता यानी एफिकेसी रेट भी पता नहीं है कि यह कितनी प्रभावी होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार के पास 200 रुपए प्रति डोज की कोविशील्ड वैक्सीन उपलब्ध थी तो इस वैक्सीन को पहले चरण में शामिल क्यों किया।

सीरम पर भी सवाल (COVISHIELD SUSPECTED)
सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन (SERUM VACCINE COVISHIELD) के तीसरे चरण के परीक्षण के दौरान एक वॉलिंटयर ने न्यूरोलॉजिकल समस्या की शिकायत की थी। साथ ही, कंपनी पर पांच करोड़ रुपये के जुर्माने के लिए याचिका दायर की थी। इसके बाद सीरम ने उस वॉलंटियर पर ही मानहानि का मामला दायर करने की धमकी दी थी। क्या डीसीजीआइ ने उस पर साइड इफेक्ट को लेकर कैसे संतुष्ट हो गया कि उसक समस्या वैक्सीन से जुड़ी हुई नहीं थी?