7 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मौत के 15 घंटे में हो वॉल्व प्रत्यारोपण

देश में हृदय के वॉल्व दान देने वालों की सीमित संख्या के कारण जरूरतमंदों को इसे मुहैया कराना चुनौती बन गया है। ऐसे में वॉल्व प्रत्यारोपण की जागरूकता जरूरी है।
less than 1 minute read
Google source verification
Valve transplantation

Valve transplantation

वॉल्व को मैकेनिकल व बायोलॉजिकल प्रत्यारोपण के जरिए बदल सकते हैं
खराब वॉल्व को मैकेनिकल व बायोलॉजिकल प्रत्यारोपण के जरिए बदल सकते हैं। बायोलॉजिकल प्रत्यारोपण में रोगी के शरीर में इसे प्रत्यारोपित करते हैं, इसे होमोग्राफ्ट कहते हैं। इनकी कार्यक्षमता बेहतर होती है। इसमें खून को पतला करने की दवाओं की जरूरत नहीं होती। प्राकृतिक होने के कारण यह छोटे बच्चों, गर्भवती महिला व बुजुर्गों को राहत पहुंचाता है। मैकेनिकल, टाइटेनियम व स्टील धातु से बने वॉल्व होते हैं। संक्रमण, बढ़ती उम्र, पूर्व में हुआ असफल हृदय वॉल्व प्रत्यारोपण व आनुवांशिकता वॉल्व खराब होने की अहम वजह हैं।
हृदय वॉल्व क्या है?
ऑक्सीजनयुक्त रक्त को इकट्ठा कर शरीर में रक्त पंप करने का काम हृदय के चार वॉल्व करते हैं। ये जीवनभर काम करते हैं और मृत्यु के कुछ घंटे तक भी उपयोगी रहते हैं।
मृत्यु के बाद वॉल्व दान
रिफे्रजरेट न हुए शव से हृदय वॉल्व को प्रत्यारोपण के लिए 15 घंटे में व रिफ्रेजरेट हुए शव से 24 घंटे में निकालना जरूरी है। व्यक्ति की जिस जगह मृत्यु हुई है वहां प्रशिक्षित विशेषज्ञ ही वॉल्व निकाले। वॉल्व के प्रत्यारोपण केंद्र पर पहुंचने के बाद विशेषज्ञ इसकी कीटाणुरहित पैकेजिंग कर नाइट्रोजन सॉल्यूशन में स्टोर करते हैं। 10 वर्ष तक इसका उपयोग संभव है।
डॉ. राकेश चित्तोड़ा, हृदय रोग विशेषज्ञ