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यूरिन का रंग बदलने लगे तो कब लें डॉक्टर की सलाह?

अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या में पर्याप्त मात्रा में 2.5 से 3 लीटर पानी पीते हैं तो शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन होता है। यूरिन हल्का पीला व पारदर्शी हो सकता है। विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। पूरे दिन में 1.5 से 2 लीटर तक यूरिन निकलना चाहिए। औसत वयस्क के लिए 24 घंटे की अवधि में 4 से 10 बार पेशाब की यात्रा को सामान्य माना जाता है।

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यूरिन

दवाएं भी बनती हैं वजह
यदि आप ऐसी दवाएं नहीं ले रहे हैं या आपने ऐसा कुछ नहीं खाया है जिससे पेशाब के रंग पर असर पड़ सकता है तो यह चिंता की बात होती है। यदि आपकी यूरिन लगातार बहुत गहरे पीले या नारंगी है तो चिकित्सक को दिखाएं। कई बार यह लिवर में खराबी के कारण भी हो सकता है। यदि यूरिन में बहुत ज्यादा बदबू या पेट में लगातार दर्द है तो भी चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इसके अलावा कई बार इसके साथ चक्कर आना या भ्रम होना, बुखार भी आता है तो यह किसी बीमारी का संकेत है।

कितना पानी पीना चाहिए?
सामान्य तौर पर एक व्यस्क को जो किसी ऑफिस में रहकर या घर में रहकर काम करता है उसको एक दिन में औसतन 2.5 ये 3 लीटर पानी पीना चाहिए। यदि आउटडोर में ज्यादा मेहनत करते हैं तो दिन में औसतन 3 से 3.5 लीटर पानी पी सकते हैं। सामान्यत: एक लीटर पानी पसीने, लार या थूक के जरिए निकल जाता है। यदि जरूरत से कम पानी पीते हैं तो उनके पेशाब के रंग में बदलाव आएगा। इसलिए अपनी दिनभर की गतिविधि के आधार पर पानी पीना चाहिए।
क्या जब प्यास लगे तभी पीएं पानी?
नहीं। ऐसा नहीं है। प्यास लगने पर पानी पीने से हाइडे्रशन से बचा जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। नियमित अंतराल पर काम के बीच, काम के दौरान और जब भी समय मिले पानी पीते रहें। ऐसे ही यदि मौसम बहुत गर्म है या उमस भरा दिन है, या आप स्तनपान कराती हैं अथवा दिनभर बहुत सारी शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं तो नियमित अंतराल पर भरपूर मात्रा में पानी पीना सुनिश्चित करें। यदि आप प्यास लगने तक पानी पीने के लिए इंतजार कर रहे हैं तो इससे समस्या हो सकती है।
एक्सपर्ट : डॉ. हिमांशु पांडेय, यूरोलॉजिस्ट, रिनल ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, एम्स जोधपुर