World Cancer Day 2025: शोध में सामने आया है कि जो लोग धुम्रपान नहीं करते हैं उनमें भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ने के मामले सामने आए है। ऐसे में जानिए क्या है इसके पीछे का कारण।
World Cancer Day 2025: कैंसर की बीमारी से हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। यह बहुत तेजी से पूरी दुनिया में अपने पैर जमा रही है। कैंसर के कई प्रकार होते हैं उनमें फेफड़ों का कैंसर भी शामिल है। यह कैंसर होने का कारण NIH की रिपोर्ट के अनुसार सिगरेट पीने को माना जाता है। लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में चौंकाने वाला मामला आया है। इस स्टडी में बताया गया है कि सिगरेट नहीं पीने वाले लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
द लांसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल की स्टडी में बताया गया है कि जो लोग धुम्रपान नहीं करते हैं उनमें भी फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। पहले फड़ों के कैंसर ( World Cancer Day 2025) का मुख्य कारण धूम्रपान को ही माना जाता था लेकिन अब ऐसा होने के बाद यह एक चिंता का विषय बन गया है। अब लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि जब धुम्रपान ही नहीं कर रहे हैं तो फेफड़ों का कैंसर होने का कारण क्या है। लेकिन स्टडी में बताया गया है कि इसके पीछे का कारण वायु प्रदुषण है।
ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी' डेटा का विश्लेषण जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी सहित अन्य संगठनों के शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर फेफड़ों के कैंसर के मामलों का अनुमान लगाने के लिए किया था। उनका मानना है कि एडेनोकार्सिनोमा जो पुरुषों और महिलाओं में प्रमुख रूप से पाया गया है। इस सर्वे में दुनिया भर में कभी धूम्रपान नहीं करने वालों में फेफड़े के कैंसर के 53-70 प्रतिशत मामले पाए गए। शोधकर्ताओं ने लिखा, ‘‘विश्व भर के कई देशों में धूम्रपान का प्रचलन कम होता जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी कभी धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों में फेफड़े के कैंसर का अनुपात बढ़ रहा है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।