
Thalassaemia Treatment (image- gemini AI)
Thalassaemia Treatment: भारत को थैलेसीमिया के मामले में विश्व की राजधानी कहा जाता है क्योंकि भारत में इस बीमारी के सबसे ज्यादा मरीज हैं। थैलेसीमिया असल में एक आनुवंशिक रोग होता है। इसमें हमारे रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। थैलेसीमिया और एनीमिया के लक्षण लगभग समान होते हैं लेकिन ये दोनों बीमारियां अलग-अलग होती हैं। एनीमिया पोषक तत्वों में आयरन की कमी से होने वाला रोग होता है, जबकि थैलेसीमिया हीमोग्लोबिन प्रोटीन की कमी से होता है। थैलेसीमिया के मरीजों को जीवित रहने के लिए लगभग हर महीने ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
थैलेसीमिया के मरीजों के लिए अब एक नई खुशखबरी आ चुकी है। अमेरिकी FDA द्वारा मंजूर की गई 'मितापीवाट' (Aqvesme) नामक दवा को मंजूरी मिल चुकी है। यह दुनिया की पहली ऐसी मुंह से ली जाने वाली दवा है जिसे मरीज एक गोली की तरह लेकर थैलेसीमिया से मुक्त हो सकता है। अब मरीजों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दर्द से नहीं गुजरना पड़ेगा। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
भारत में थैलेसीमिया के लगभग 1,50,000 मरीज हैं और हर साल लगभग 10 हजार से 12 हजार बच्चे थैलेसीमिया के साथ पैदा होते हैं। विश्व में थैलेसीमिया के जितने कुल मरीज हैं, उनमें से हर आठवां मरीज भारत में रहता है। भारत में मरीजों की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण ही इसे थैलेसीमिया के मामले में विश्व की राजधानी कहा जाता है। थैलेसीमिया को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत अक्षमता (डिसएबिलिटी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अब इसकी ओरल पिल भारत में आने के बाद यहाँ से भी थैलेसीमिया का खतरा कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
02 Jan 2026 03:43 pm
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