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Colorectal Cancer in Young: 26 साल के युवक को हुआ खतरनाक कैंसर, डॉक्टर ने बताया युवाओं में क्यों बढ़ रहे मामले

Colorectal Cancer in Young: डॉक्टर की एक पोस्ट ने बढ़ाई चिंता, 26 साल के युवक में मिला स्टेज-3 कोलोरेक्टल कैंसर। जानिए युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं इसके मामले और क्या हैं लक्षण।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 07, 2026

Colorectal Cancer in Young

Colorectal Cancer in Young (photo- gemini ai)

Colorectal Cancer in Young: आज तक कोलोरेक्टल कैंसर यानी बड़ी आंत या मलाशय का कैंसर आमतौर पर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में देखा जाता था। लेकिन अब डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी तेजी से युवाओं में भी बढ़ रही है। हाल ही में अमेरिका के एक डॉक्टर की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद इस मुद्दे पर फिर से चर्चा तेज हो गई है।

अमेरिकी डॉक्टर जेसन आर. विलियम्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर बताया कि उन्होंने 26 साल के एक युवक का इलाज किया, जिसे स्टेज-3 रेक्टल कैंसर पाया गया। यह बात इसलिए चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि पहले इतनी कम उम्र में इस तरह का कैंसर बहुत दुर्लभ माना जाता था। डॉक्टरों के मुताबिक 1990 के दशक की शुरुआत से ही युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई युवा मरीजों में इस बीमारी का पता तब चलता है जब यह काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

क्या होता है कोलोरेक्टल कैंसर

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय (रेक्टम) में होने वाला कैंसर है। पहले यह बीमारी ज्यादातर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में पाई जाती थी, लेकिन अब 20 से 40 साल के बीच के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले तीन दशकों में इस बीमारी के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, इसलिए लोगों में इसके बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं

कोलोरेक्टल कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। कई देशों में इसकी स्क्रीनिंग आमतौर पर 45 या 50 साल की उम्र के बाद शुरू होती है। यही वजह है कि कम उम्र के लोगों में यह बीमारी अक्सर देर से पकड़ में आती है। इस बीमारी के कुछ आम लक्षण हैं जैसे लंबे समय तक पेट साफ न होना या बार-बार दस्त होना, मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट में लगातार दर्द या असहजता और हमेशा थकान महसूस होना। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य पाचन समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है।

क्यों बढ़ रहे हैं युवाओं में मामले

वैज्ञानिक अभी तक इसका एक ही कारण नहीं बता पाए हैं, लेकिन कई ऐसे कारक हैं जो इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन, लाल मांस ज्यादा खाना और मीठे पेय पदार्थों का अधिक इस्तेमाल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली भी इसका बड़ा कारण मानी जा रही है। कुछ शोध यह भी बता रहे हैं कि पेट के बैक्टीरिया में बदलाव और पाचन तंत्र में सूजन भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती है।

जागरूकता और समय पर जांच है सबसे जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो इसका इलाज काफी आसान हो सकता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पाचन से जुड़ी समस्या या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित व्यायाम करना और फलों-सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना भी इस बीमारी के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।

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