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हरी पगड़ी की रंगत हुई फीकी, गुलाबी पगड़ी का जाटलैंड से उदय

ताऊ देवीलाल ने हरियाणा को दी थी पगड़ी की पहचान, सफेद,हरी व पीली के बाद अब गुलाबी पगड़ी की दस्तक

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Yuvraj Singh Jadon

Jun 01, 2015

pink turban

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चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति एक बार फिर से करवट ले रही है। प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को मजबूत विपक्ष देने की कवायद में उलझे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को जाटलैंड से जनसंपर्क अभियान शुरू करके नई राजनीतिक पारी की शुरूआत कर दी है। हुड्डा के इस अभियान के साथ ही हरियाणा में राजनीति की पहचान रही पगड़ी भी अब नए रूप में आ गई है। पिछले कई महीनों से जनता दल परिवार के साथ विलय की कवायद में उलझे विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल की हरी पगड़ी की रंगत अब प्रदेश की राजनीति में कुछ फीकी पड़ती जा रही है। पिछले कई माह से प्रदेश में राजनीतिक मुद्दों को विपक्षी दल के रूप में उठाने के लिए हरी पगड़ी का स्थान गुलाबी पगड़ी ले रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सत्ता में रहते हुए भी अपने समर्थकों को रैलियों में गुलाबी पगड़ी पहनाकर ले जाते रहे हैं लेकिन रविवार को जींद में पहली बार उन्होंने अपने स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें उनके समर्थक गुलाबी पगडिय़ों में पहुंचे। इसका साफ संकेत है कि भविष्य में गुलाबी पगड़ी हुड्डा समर्थकों की पहचान रहेगी।

हरियाणा के राजनीतिक इतिहास पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो यह बात साफ होती है हरियाणवी राजनीति में पगड़ी की शुरूआत पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय ताऊ देवीलाल ने की थी। देवीलाल ने अपने समर्थकों को शुरूआती दौर में केवल पगड़ी पहनाई थी। उसके बाद जब पार्टी की कमान चौटाला के हाथ में आई तो उन्होंने हरी पगड़ी को प्रचलित कर दिया।
इसी दौर के नेता स्वर्गीय बंसीलाल को पगड़ी की बजाए टोपी पसंद थी। बंसीलाल के राजनीतिक जीवन में ऐसे बहुत कम मौके आए जब उन्होंने पगड़ी पहनी। हरियाणा की राजनीति के एक अन्य लाल स्वर्गीय भजनलाल ने भी कांग्रेस में रहते हुए कभी पगड़ी नहीं पहनी अलबत्ता कभी-कभार साफा जरूर बांधा। भजनलाल ने कांग्रेस से अलग होकर जब अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस बीएल का गठन किया तो उन्होंने न केवल खुद पीली पगड़ी धारण की बल्कि अपने समर्थकों को भी पीली पगड़ी व पीला पटका दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने समर्थकों को अलग पहचान दिलाने के उद्देश्य से गुलाबी पगड़ी को पूर्ण रूप से धारण कर लिया है। हुड्डा तथा उनके सांसद पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों में अक्सर गुलाबी पगड़ी में ही दिखाई देते हैं। इस बीच पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान अलग राजनीतिक दलों का गठन करने वाले पूर्व गृहमंत्री गोपाल कांडा ने अपने समर्थकों को गेरूआ रंग की पगड़ी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने अपने समर्थकों को राजस्थानी पगड़ी पहनाकर अलग पहचान दिलाने की कोशिश की थी लेकिन यह दोनों नेता वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से गायब हैं।

पगड़ी बदल भाईयों का भी चला था दौर
हरियाणा की राजनीति में एक दौर ऐसा भी आया था जब स्वर्गीय ताऊ देवीलाल ने समर्थकों को अपने साथ पक्के तौर पर जोडऩे के लिए पगड़ी बदल भाई बनने का अभियान चलाया था। जिसके तहत देवीलाल गावों का दौरा करते समय अपने सबसे करीबियों के साथ पगड़ी बदलकर उनके भाई बन जाते थे। पगड़ी बदल भाई बनाने के पीछे समर्थकों को अपने साथ पक्के तौर पर जोड़ते हुए उनके साथ परिवारिक रिश्ता कायम करना था। हरियाणा में यह प्रक्रिया लंबे समय तक चली। आज भी प्रदेश के गावों में कई पुराने बजुर्ग ऐसे हैं, जिन्होंने वर्षों पहले देवीलाल के साथ पगड़ी बदली थी और वह आज भी इनेलो के साथ जुड़े हुए हैं।

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