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हॉलीवुड की ‘मूलन’ भी ओटीटी पर, लड़के के भेष में लड़की

लड़के के भेष में लड़की का खेल अब हॉलीवुड की फिल्म 'मूलन' ( Hollywood Movie Mulan ) में पेश किया गया है। मार्च से सिनेमाघरों का इंतजार कर रही यह फिल्म हाल ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आ गई है। हॉलीवुड 1988 में इसी नाम से एनिमेशन फिल्म बना चुका है। चीन की लोक कथा 'बेलेड ऑफ मूलन' पर आधारित इस फिल्म का किस्सा यह है कि चीन के प्राचीन काल का एक शासक हमलावरों से निपटने के लिए जंग की तैयारी कर रहा है।

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हॉलीवुड की 'मूलन' भी ओटीटी पर, लड़के के भेष में लड़की

हॉलीवुड की 'मूलन' भी ओटीटी पर, लड़के के भेष में लड़की

-दिनेश ठाकुर
हसरत जयपुरी का खासा लोकप्रिय गीत है- 'लाख छिपाओ छिप न सकेगा राज हो कितना गहरा/ दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा।' अगर कोई लड़की अपनी जुल्फें बॉब कट करवा ले, नाक के नीचे मूंछें चिपका ले और लड़कों जैसे कपड़े पहन ले तो क्या लोग उसे लड़का मानने लगेंगे? इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि वह लड़की हकीकत है या किसी फिल्म का किरदार। अगर वह फिल्म की है तो आप लाख न मानना चाहें, फिल्म वाले मनवा कर छोड़ेगे कि वह लड़का लग रही है। आपको भले न लगे, फिल्म के बाकी किरदारों को वह लड़का ही लगेगी। 'विक्टोरिया नं. 203' में सायरा बानो ने इसी तरह लड़का बनकर तांगा चलाया था। धर्मेंद्र की 'दो चोर' में तनूजा लड़का बनकर चोरियां करती थीं। 'हिम्मत' में मुमताज भी कुछ देर लड़का बनकर घूमीं थीं और जीतेंद्र के लिए उनके इर्द-गिर्द नाचते हुए 'मैं तेरे नाज उठाता, तुझे बागों की सैर कराता, अगर तू लड़की होती' गाने की गुंजाइश निकल आई थी। सत्तर के दशक में जीतेंद्र की ही 'आतिश' में नीतू सिंह लड़का तो नहीं बनी थीं, लेकिन उन पर एक गाना फिल्माया गया था- 'लड़के के भेष में लड़की हूं, रहने वाली मैं कोटगढ़ की हूं।'

लड़के के भेष में लड़की का खेल अब हॉलीवुड की फिल्म 'मूलन' में पेश किया गया है। मार्च से सिनेमाघरों का इंतजार कर रही यह फिल्म हाल ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आ गई है। हॉलीवुड 1988 में इसी नाम से एनिमेशन फिल्म बना चुका है। चीन की लोक कथा 'बेलेड ऑफ मूलन' पर आधारित इस फिल्म का किस्सा यह है कि चीन के प्राचीन काल का एक शासक हमलावरों से निपटने के लिए जंग की तैयारी कर रहा है। उसका आदेश है कि हर परिवार से एक पुरुष फौज में शामिल हो। उसके एक बीमार योद्धा की बेटी हुआ मूलन लड़के का भेष धारण कर फौज में शामिल हो जाती है। जाहिर है कि वह चीनी है तो मार्शल आर्ट्स से लेकर तलवारबाजी तक में माहिर है। वह फौज में है तो हमलावरों की हड्डी-पसली एक होगी ही। मूलन का किरदार चीनी अभिनेत्री लिऊ यिफी ने अदा किया है, जो इससे पहले 'द लव विनर', 'फॉर लव ऑफ मनी' और 'द चाइनीज विंडो' में नजर आई थीं।

निर्देशक निकी कारो की इस फिल्म में भव्यता तो खूब है, उन भावनाओं का अभाव है, जो दर्शकों को कहानी से बांधने के लिए जरूरी होती हैं। एक्शन और स्टंट की भरमार भी ऊपरी तड़क-भड़क बनकर रह जाती है। निकी कारो हॉलीवुड की होनहार फिल्मकारों में गिनी जाती हैं। हैरानी हुई कि 'मूलन' में उन्होंने अपनी ऊर्जा ऐसी दौड़ दिखाने में खर्च कर दी, जो दर्शकों को कहीं नहीं ले जाती। पटकथा काफी ढीली है।

हॉलीवुड वाले फिल्मों पर पैसा पानी की तरह बहाते हैं। 'मूलन' की लागत 20 करोड़ डॉलर (करीब 14.63 अरब रुपए) बताई जा रही है। भारत में अब तक रजनीकांत की तमिल फिल्म '2.0' के निर्माण पर सबसे ज्यादा धन (5.7 अरब रुपए) खर्च हुआ, जबकि सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 'दंगल' 70 करोड़ रुपए में बन गई थी। यानी एक 'मूलन' के बजट में 20 'दंगल' बन सकती हैं।