scriptNovel coronavirus Death date released in india after panchak | एक बार फिर लॉकडाउन के बीच आया पंचक, जानिये कब होगा कोरोना का अंत | Patrika News

एक बार फिर लॉकडाउन के बीच आया पंचक, जानिये कब होगा कोरोना का अंत

नए साल यानि नवसंवत्सर 2077 की शुरुआत भी पंचक में हुई...

भोपाल

Updated: April 27, 2020 01:50:41 pm

25 मार्च 2020 को शुरु हुए हिंदुओं के नववर्ष यानि नवसंवत्सर 2077 की शुरुआत पंचक में हुई थी। दरअसल इस बार जहां चैत्र नवरात्रों Chaitra Navratri 2020 की शुरुआत 25 मार्च, बुधवार से हुई थी, वहीं दूसरी ओर पांच दिनों तक चलने वाले पंचक 21 मार्च यानि शनिवार से शुरू हो गए थे। वहीं पंचकों का असर लंबे समय तक रहने की भी मान्यता है।

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Novel coronavirus Death date released in india after panchak

वहीं अप्रैल 2020 में एक बार फिर पंचक आने से स्थिति काफी गंभीर मानी जा रही है। दरअसल अप्रैल में 17 से 21 तक पंचक रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के बीच इन पंचकों का असर भी लंबे समय तक रह सकता है। ऐसे में लोगों के बीच एक बार फिर कोरोना के लंबे समय तक रहने की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं।

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जबकि इससे पूर्व नवसंवत्सर के समय लगे पंचक के संबंध में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि Chaitra Navratri 2020 के मुताबिक पंचक की शुरुआत 21 मार्च, शनिवार को धनिष्ठा नक्षत्र में प्रातः 6:20 पर हुई, जिनकी समाप्ति 26 मार्च, गुरुवार को रेवती नक्षत्र में प्रातः 7:16 पर हुई थी। यानि ये पंचक शनिवार को शुरु हुए थे।

वहीं मान्यता के अनुसार शनिवार से शुरू होने वाले पंचक मृत्यु पंचक कहलाते हैं। यह पंचक काफी घातक और अशुभ पंचक माना जाता है। इस साल मृत्यु पंचक में ही नवरात्रों की शुरुआत हो रही है।

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पंचक प्रभाव : कोरोना का अंत....
अप्रैल 2020 में लगे इन पंचकों ने जहां आम लोगों की कोरोना को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं कई ज्योतिष के जानकार भी पंचकों के कोरोना पर असर की बात से इत्तेफाक भी रखते हैं। इनका मानना है कि पंचकों का प्रभाव लंबे समय तक रहने के चलते यह कोरोना को प्रभावित कर सकता है।

वहीं कोरोना संक्रमण के संबंध में पंडित शर्मा का कहना है कि ज्योतिष के अनुसार जिस भी वर्ष का राजा शनि होता है और वर्ष के अंत में सूर्यग्रहण पड़ता है तो आने वाले साल में महामारी या युद्ध जैसे हालात पैदा होते हैं।

ऐसे में संवत्सर 2076 के राजा शनि थे तो वहीं 26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण भी लगा था, ऐसे में यह महामारी या युद्ध के होने के संकेत थे, यानि जनहानि, धनहानि के संकेत... जो अभी हो भी रहा है।

पंडित शर्मा के अनुसार 13 अप्रैल 2020 की रात्रि सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश किया। वहीं भारत में कोरोना से कुछ हद तक राहत आने वाले सूर्य ग्रहण यानि 21 जून 2020 आषाढ़ अमावस्या (रविवार) के कुछ दिन बाद से मिलने की संभावना है, यह बेहद संवेदनशील ग्रहण होगा। लेकिन सूर्यग्रहण के बाद ग्रहों की चाल इस ओर संकेत करती है कि इस दौरान देश के कुछ राज्य व शहर कोरोना से राहत महसूस कर सकते हैं।

इन राज्यों व शहरों को राहत मिलने की उम्मीद...
इनमें दिल्ली-प्रदेश, हरियाणा, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, वाराणसी “काशी”, प्रयागराज, जोधपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, धार, खंडवा, खरगोन, नासिक, ओड़िशा, जगन्नाथपुरी, कटक, भुवनेश्वर सहित निकटवर्ती क्षेत्र और समुद्री तटवर्तीय क्षेत्र।

जबकि ग्रहण के चलते चीन जापान इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विशेष भाग में प्राकृतिक आपदा से जन-धन हानि भी इसे ग्रहण के परिणाम स्वरूप दिखाई देगी। वहीं भारत में भी यमुना किनारे बसे शहरों में इस ग्रहण का असर निगेटिव हो सकता है।

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ऐसे समझें सूर्यग्रहण को...
इस सूर्यग्रहण का सूतक 20 जून 2020 की रात्रि 10:00 बजे से प्रारंभ हो जाएगा।

ग्रहण का समय:– 21 जून 2020 सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक (भारतीय समयानुसार)

पूर्ण ग्रहण- सुबह 10:17 बजे से 2.02 बजे तक होगा, वहीं 12:10 बजे पर ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव होगा।

कहां-कहां दिखेगा सूर्यग्रहण...
: भारत, एशिया और दक्षिण पूर्व यूरोप
: मिथुन राशि में होने वाला यह ग्रहण नगर से नक्षत्र में आरंभ होकर आद्रा नक्षत्र में पूर्ण होगा अतः निर्देशित और आद्रा नक्षत्र वालों के लिए विशेष कष्टकारी रहेगा।

चंद्रग्रहण जुलाई 2020 में...
वहीं 4/5 जुलाई 2020 को लगने जा रहा चंद्र ग्रहण अमेरिका और पश्चिम के देशों के लिए विशेष रूप से अशुभ रहने के संकेत हैं। लेकिन जुलाई के मध्य या बाद से भारत में भी पुन: कोरोना संक्रमण के कैस सामने आने लगेंगे, वहीं यह स्थिति सितंबर तक बनी रह सकती है।

ऐसे समझें पंचक...
दरअसल कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले लोग अच्छे मुहूर्त के लिए जानकारों व पंडितों से चर्चा करते है, इसका कारण ये है कि माना जाता है कि अशुभ समय में किए गए कार्यों से मनचाहा परिणाम नहीं मिलता है। यही कारण है कि पंचक में बहुत से शुभ काम करने की मनाही है।

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ज्योतिष शास्त्र में पंचक को शुभ नक्षत्र नहीं माना जाता है। जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि पर रहता है उसी समय को पंचक कहते हैं। इसे अशुभ और हानिकारक नक्षत्रों का योग माना जाता है। वहीं ये भी माना जाता है कि पंचकों का प्रभाव लंबे समय तक रहता है, इसलिए इन दिनों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

पंचक को लेकर ये है मान्यता:
पंचक के संबंध में माना जाता है कि इस दौरान यदि कोई अशुभ कार्य हो तो उनकी पांच बार आवृत्ति होती है। इसलिए उसका निवारण करना आवश्यक होता है। किसी की मृत्यु के समय खासतौर पर पंचक को ध्यान में रखा जाता है।

ये मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक के दौरान हो जाए तो घर-परिवार में पांच लोगों पर मृत्यु के समान संकट रहता है। ऐसे में जिस व्यक्ति की मृत्यु पंचक के दौरान होती है, उसके दाह संस्कार के समय आटे-चावल के पांच पुतले या पिंड बनाकर साथ में उनका भी दाह कर दिया जाता है। इससे परिवार पर से पंचक दोष समाप्त हो जाता है।

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ये होता है पंचक-
पं. शर्मा के अनुसार धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र, ये सभी पंचक के अंतर्गत ही आते हैं। इन पांच नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को ‘पंचक काल’ कहा जाता है।

पंचक धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से प्रारंभ होकर रेवती नक्षत्र के अंतिम चरण तक रहता है। हर दिन एक नक्षत्र होता है इस हिसाब से धनिष्ठा से रेवती तक पांच दिन हुए। ये पांच दिन पंचक होता है।

लॉकडाउन के बीच शुक्रवार का पंचक: वहीं इस बार लगे पंचक के दिन यानि 17 अप्रैल को शुक्रवार था, बता दें कि शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। ज्योतिषों के अनुसार, इस पंचक में यात्रा करने की मनाही होती है। चोर पंचक के अलावा, पंचक के 4 और प्रकार होते हैं। रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक और मृत्यु पंचक।

इन बातों का रखें ध्यान:
लॉक डाउन के समय में तो लोग अपने घर से बाहर नहीं ही निकल पा रहे हैं, वैसे भी पंचक के दौरान यात्रा करने से बचना चाहिए। इसके अलावा धन से जुड़ा कोई कार्य भी पूर्णत: निषेध माना गया है। ऐसा माना जाता है कि पंचक के समय में धन हानि के आसार अधिक होते हैं। वहीं, पंचक के बीच ना ही घर की छत और पलंग बनवाना चाहिए और ना ही ईंधन का सामान इकट्ठा करना चाहिए। पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।

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