
aaj ki kundli
एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि रात्रि १.०५ तक, तदुपरान्त द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। एकादशी तिथि में यज्ञोपवित, विवाह आदि मांगलिक कार्य, गृहारम्भ, गृहप्रवेश, यात्रा, अलंकार, देवकार्य, देवोत्सव, चित्रकारी और व्रतोपवास आदि कार्य शुभ होते हैं। द्वादशी में सभी चर व स्थिर कार्य, विवाह व जनेऊ आदि के कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं।
शुभ वि.सं. : २०७४, संवत्सर: साधारण, अयन: दक्षिणायण, शाके: १९३९, हिजरी: १४३९, मु.मास: मुहर्रम-२४, ऋतु: शरद्, मास: कार्तिक,पक्ष: कृष्ण।
नक्षत्र: मघा ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र अंतरात्रि अगले दिन सूर्योदय पूर्व प्रात: ६.०७ तक, तदुपरान्त पूर्वाफाल्गुनी ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। मघा नक्षत्र में यथा आवश्यक पैतृक कार्य, वृक्ष, बीजादि रोपण, तालाब, कुआं आदि खनन, विवाह, युद्ध और साहसिक कार्य करने योग्य है।
विशिष्ट योग: यमघंट नामक योग सूर्योदय से अंतरात्रि ६.०७ तक, तदुपरान्त सूर्योदय तक राजयोग नामक शुभ योग रहेगा। यमघंट योग में विशेषत: यात्रा शुभ नहीं रहती।
चंद्रमा: सम्पूर्ण दिवारात्रि सिंह राशि में रहेगा।
वारकृत्य कार्य: रविवार को सभी स्थिर कार्य, राज्याभिषेक, वायुयान यात्रा, राजसेवा, पशु क्रय, आमोद-प्रमोद भ्रमण, धातु कार्य, जड़ी-बूटी संग्रह करना, औषध निर्माण तथा यज्ञादि-मंत्रोपदेश आदि कार्य करने चाहिए।
दिशाशूल : रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी।
राहुकाल
सायं ४.३० बजे से सायं ६.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभ कार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।
श्रेष्ठ चौघडि़ए
आज प्रात: ७.५६ से दोपहर १२.१३ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद १.३८ से अपराह्न ३.०४ तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं तथा दोपहर ११.५० से दोपहर १२.३५ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।
शुभ मुहूर्त
१७ अक्टूबर : धनतेरस का स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त है। अत: उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र में विपणि-व्यापारारम्भ, वाहन क्रय करना, मशीनरी-कलकारखाना प्रारम्भ, प्रसूतिस्नान व हलप्रवहण।
१९ अक्टूबर : विपणि-व्यापारारम्भ चित्रा में (वैधृति के बाद)।
२० अक्टूबर : नामकरण, विपणि-व्यापारारम्भ चित्रा में तथा प्रसूति स्नान व हलप्रवहण स्वाति नक्षत्र में।
व्रत त्योहार
१७ अक्टूबर : भौम प्रदोष व्रत, धनतेरस (स्वयंसिद्ध अनबूझ मुहूर्त)।
१८ अक्टूबर : रूप व नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी निमित्त अरुणोदय काल में प्रभात स्नान व दीपदान (चन्द्रोदय जयपुर में प्रात: ४.५४ पर), नरक चतुर्दशी निमित्त सायं दीपदान।
१९ अक्टूबर : दीपावली (स्वयंसिद्ध अनबूझ मुहूर्त), श्रीमहालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजा, देवपितृकार्य अमावस्या, वैधृति पुण्यं, महावीर निर्वाण दिवस (जैन)।
२० अक्टूबर : अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, बलिराज पूजा, जैन संवत् २५४४ प्रारम्भ।
२१ अक्टूबर : भैया दूज, यम द्वितीया, विश्वकर्मा दिवस, चित्रगुप्त पूजा, कलम-दवात पूजा (बिहार में)।

Published on:
15 Oct 2017 09:36 am

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