28 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Pitra Paksha 2019: कौओं की संख्या घटी तो पितरों में बंदर, गाय व अन्य पक्षी बने विकल्प

नर्मदा में स्नान के बाद तर्पण कर किया पूर्वजों को याद

2 min read
Google source verification
कौओं की संख्या घटी तो पितरों में बंदर, गाय व अन्य पक्षी बने विकल्प

कौओं की संख्या घटी तो पितरों में बंदर, गाय व अन्य पक्षी बने विकल्प

होशंगाबाद/ सोलह दिवसीय पितृपक्ष की शुरूआत हो चुकी है। शुक्रवार को सेठानीघाट पर लोगों ने अपने पूर्वजों को याद कर तर्पण किया। मान्यता है कि पितरों को जल देने से घर में सुख शांति बनी रहती है। भादो मास की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर श्राद्ध अमावस्या तक चलेंगे। जिसमें परिजन अपने पितरों के नाम का तर्पण कर पानी और भोजन देंगे। इस भोजन में से एक हिस्सा कौए को दिया जाता है। लेकिन शहर और गांवों से कौए लुप्त होने की कगार पर हैं। आचार्य सोमेश परसाई के अनुसार पितरों का एक हिस्सा कौओं को दिया जाता है। लेकिन लगातार हो रही बिल्डिंग और रेडिऐशन के कारण कौओं को बैठने के लिए मुंडेर नहीं मिल रहे है। जिससें कौओं की संख्या लगातार कम होती जा रही हैं। साथ ही इनकी जगह पर बंदर, गाय व अन्य पक्षियों को विकल्प बना लिया है।

इसलिए दिया जाता है पितरों को तर्पण
मान्यता अनुसार इन दिनों में आत्माएं परिजनों से मिलने घर पहुंचती है। आत्मा तृप्ती के लिए श्राद्ध किया जाता है। कौआ यमराज का वाहक है। जो श्राद्ध पक्ष में घर-घर जाकर खाना ग्रहण करते हैं। इसलिए माना जाता है कि यमलोक में इससे पितरों को तृप्ति मिलती है। इनके कम होने के कारण अब बंदर, गाय और अन्य पक्षियों को भोजन का अंश देकर अनुष्ठान किया जाता है।

read this news

shradh paksh 2019- श्राद्ध की हर तिथि में छुपा है राज, हर श्राद्ध से मिलता है खास आशीर्वाद

pitru paksha 2019 जानें क्यों जरूरी है पितरों का श्राद्ध करना, जानकर आप भी जरूर करेंगे