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नई दिल्ली। 12 वीं के छात्र सिद्धार्थ संतोष, वरुण दुरई, निखिल दीपक, सौरव संजीव और कुशाग्र सेठी वो काम कर रहे हैं जो समाज को इंसानियत का पाठ पढ़ा जाता है। पढ़ाई के इस स्तर पर आते ही जहां आजकल के बच्चे बाकि चीजों से मन हटाकर पढ़ाई में मन लगाते हैं वहां ये बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अनाथ बच्चों का पेट भी भरते हैं। अपनी पढ़ाई पूरी कर ये बच्चे करीब 800 किलो खाने को बर्बाद होने से बचाते हैं। द बेटर इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये बच्चे Waste Nought की पहल कर रहे हैं। ये बच्चे स्कूल के हॉस्टलों में बचने वाले खाने को इकट्ठा करते हैं और अनाथालय ले जाते हैं। ताकि उन बच्चों को अच्छा और पौष्टिक खाना मिल सके।
इन बच्चों का कहना है कि शुरुआत में हमने गौर किया कि हॉस्टलों में बच्चों के खाना खाने के बाद काफी खाना बच जाया करता था। इन बच्चों ने रिसर्च की और पाया कि भारत में अकेले भूख की वजह से करीब 7 हज़ार लोग हर रोज़ अपनी जान से जाते हैं। ये आंकड़े देख वे चौंक गए। उन्हें चिंता सताने लगी कि जिस देश में इतना सारा खाना बर्बाद हो रहा वहां इतनी संख्या में लोग भूख के कारण मर रहे हैं। पांचों दोस्तों ने ठान ली कि अब ये खाना उनके रहते बर्बाद नहीं होगा। कई एनजीओ से संपर्क करने के बाद उन्होंने बेंगलुरु के बत्तराहल्ली में श्री कृष्णाश्रय एजुकेशनल ट्रस्ट की खोज की। उन्होंने तय किया कि वे बचे खाने को इस ट्रस्ट के अनाथालय के बच्चों को परोसेंगे।
बता दें कि इस अनाथालय में 5 से 18 साल के 30 बच्चे, 27 लड़के और तीन लड़कियां रहती हैं। अब ववे हर शनिवार स्कूल कैंटीन से बचे हुए भोजन को पैक करते हैं और उसे अनाथालय में ले जाते हैं। यहां रहने वाले बच्चे इन पांचों दोस्तों के इस सार्थक कदम को सलाम करते हैं और उनका धन्यवाद करते हैं। खास बात ये है कि अनाथालय के बच्चों को खाना भेजने से पहले ये बच्चे उन्हें खुद चखते करते हैं तभी उसे बच्चों को परोसते हैं। इन बच्चों का मकसद अब और बड़ा हो गया है। वे अब एक अनाथालय की मदद नहीं शहर में बाकि अनाथालय में भी खाना भेजने की योजना बना रहे हैं।
Published on:
12 Sept 2019 03:45 pm
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