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आज भी लोग रावण के रूप में इस एक्टर को करते हैं याद,रावण दहन पर शोक में डूब जाता था पूरा इलाका

रामानंद सागर कृत रामायण में लंकेश का रोल निभाकर अरविंद त्रिवेदी ने बनाई पहचान अरविंद त्रिवेदी को भूल कर लंकापति रावण कहने लगे

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नई दिल्ली। रामानंद सागर के द्वारा बनाई गई रामायण में सभी पत्रों ने अपने अपने किरदारों के साथ ऐसा तालमेल बैठाया कि सीरियल के कलाकारों को लोग उनके असल नाम से कम और सीरियल के पात्र के नामों से ज़्यादा जानने लगे। रामानंद सागर की रामायण इतनी हिट हुई कि हर किरदार आज भी लोगों की ज़ुबान पर है। रामायण सीरियल में लंकेश का रोल निभाकर अरविंद त्रिवेदी ने लोगों की जुंबा पर अपनी अलग छाप छोड़ी थी। अरविंद त्रिवेदी मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर इंदौर के रहने वाले है और उनके बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी गुजराती थियेटर के जाने माने आर्टिस्ट रहे हैं। भाई की कला से प्रभावित होकर ही अरविंद ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा।

लंका पति रावण के किरदार ने उन्हें सफलता की उन बुलंदियों पर पहुंचाया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी रावण समझने लगे। अरविंद त्रिवेदी ने अपने इंटरव्यू में बताया- की मैं तो केवट के रोल के लिए ऑडिशन पर गया था लेकिन रामानंद सागर की नजरें मेरे अंदर कुछ और ही तलाश रहीं थीं। त्रिवेदी ने बताया कि- सभी कलाकारों के ऑडिशन होते रहे लेेकिन मुझे किसी ने तबज्जो नहीं दिया। जिससे काफी नर्वस हो रहा था तभी मुझे बुलाया गया था। मुझे एक स्क्रिप्ट दी गई।

स्क्रिप्ट के डायलॉग बोल कर मैं कुछ कदम ही चला था कि रामानंद जी ने लगभग चीख कर बोला, "बस, मिल गया मुझे मेरा लंकेश। यही है मेरा रावण।" मैं हैरान परेशान हो कर इधर-उधर देखने लगा कि अभी तो मैंने तो डायलॉग भी पूरा नहीं बोला पर यह क्या हो गया? जब मैंने उनसे पूछा, तो वो बोले, "मुझे मेरा रावण जैसा चाहिये था वैसा मिल गया,सागर ने कहा था रावण ऐसा हो जिसमें सिर्फ शक्ति ही नहीं बल्कि भक्ति भी हो। विद्वान होने के कारण उसके चेहरे पर तेज भी हो। मुझे सिर्फ तुम्हारी चाल से ही यह भरोसा हो गया कि तुम इस किरदार के लिए सबसे सही हो।"

यह सच है कि इस सीरियल के बाद लोग अरविंद त्रिवेदी को भूल कर लंकापति रावण कहने लगे। मेरे बच्चों को लोग रावण के बच्चे और मेरी पत्नी को मंदोदरी के नाम से पुकारने लगे थे। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि रावण का किरदार निभाकर मेरी ज़िंदगी में इतना बड़ा बदलाव आएगा, ऐसा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी लोग लंकेश के रूप में जानने लगे। त्रिवेदी ने बताया जिस दिन सीरियल में रावण मारा गया, उस दिन मेरे पूरे इलाके के लोग शोक में डूब गए थे।

वास्तव में रावण के चरित्र की लोग दिल से इज्जत करते हैं, पूरे विश्व में लोग रावण को विद्वान मानते हैं। दक्षिण में तो रावण की पूजा भी होती है, रावण ने तो भगवान राम के जरिए अपने पूरे परिवार को मोक्ष दिलाया। अगर रावण में स्वार्थ के गुण होते तो वह खुद हिरण बनकर मोक्ष प्राप्त कर लेता। रावण ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया, घोर तपस्वी भी था, अहंकार को छोड़कर रावण से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।