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विशेषज्ञों का दावा- ‘Corona vaccine के लिए मार दी जाएंगी पांच लाख शार्क’

कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine ) बनाने के लिए पांच लाख शार्क (Shark) मार दी जाएंगी इन शार्कों (Sharks) को इनके लिवर में बनने वाले एक खास तेल स्क्वैलीन (Squalene) के लिए मारा जा रहा है

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Vivhav Shukla

Sep 29, 2020

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Five lakh sharks to be killed

नई दिल्ली। दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) ने कोहराम मचा रखा है। ताजे आकड़ों के मुताबिक 3.34 करोड़ से अधिक लोग वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि कई देश इस वायरस की वैक्सीन (Corona vaccine ) बनाने का काम कर रहे हैं लेकिन इस बीच वैक्सीन को लेकर वन्य जीव विशेषज्ञों ने चौंकाने वाला दावा किया है।

डेली मेल के मुताबिक कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए पांच लाख शार्क मार दी जाएंगी। वैक्सीन से शार्क मछली के जीवन पर खतरा मंडराता दिख रहा है।

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अमेरिका के कैलिफोर्निया की शार्क अलाइज संस्था (Shark aliases) जो शार्क मछलियों के संरक्षण के लिए काम करती है उसका कहना है कि कोरोना की वैक्सीन बनाने में स्क्वालीन नाम के एक पदार्थ का उपयोग होता है, जो प्राकृतिक तौर पर शार्क के लीवर में तेल की तरह बनता है।

स्क्वालीन दवा में सहायक के तौर पर होता है और ये मजबूत इम्यूनिटी पैदाकर वैक्सीन और प्रभावी बना सकता है। संस्था में काम कर रहे एक वैत्रानिक ने बताया कि दुनियाभर के लोगों को एक खुराक कोरोना वैक्सीन देने के लिए लगभग 2.5 लाख से अधिक शार्क को मारना पड़ेगा। लेकिन अगर खुराक को बढ़ाया जाता है तो ये आंकड़ा 5 लाख भी पार कर सकता है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीन के लिए इतनी शार्क को नहीं मारना एक और खतरा पैदा कर सकता है। साथ ही ये भी जरूरी नहीं की इससे बनी वैक्सीन उतनी कारगर भी होगी।

वहीं वैक्सीन बनाने वाली ब्रिटिश फार्मा कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन के मुताबिक फ्लू की वैक्सीन बनाने में शार्क के स्क्वालीन का इस्तेमाल होता रहा है। लगभग तीन हजार शार्क से हम एक टन स्क्वालीन निकालते हैं।

बता दें एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगभग 30 लाख शार्क को मार दिया जाता है। स्क्वालीन का इस्तेमाल कॉस्मेटिक उत्पादों और मशीनों के तेल में भी किया जाता है। आने वाले समय में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। जिसकी वजह से जीव विशेषज्ञों की चिंता है कि आने वाले समय में शार्क की आबादी खत्म भी हो सकती है।