
नई दिल्ली। एक तरफ जहां लोग करियर बनाने और जल्द सेटल होने के लिए एक अच्छी सैलरी वाली जॉब ढूंढ कर लाखों रूपए कमाने के बारे में सोच रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो लाखों की नौकरी छोड़ अपनें गांव अपने समाज के लिए कुछ अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसी ही एक शख्स हैं पूजा भारती जिन्होंने लाखों का पैकेज छोड़कर गांव में खेती करना शुरू किया।
आईआईटी खड़गपुर से ग्रेजुएट हैं पूजा
पूजा बिहार राज्य के नालंदा जिले में कंचनपुर गाँव की रहने वाली हैं। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ले रखी है। इंजीनियरिंग के दौरान उन्होंने अमेरिका की एक फर्म में इंटर्नशिप की और फिर साल 2009 में GAIL कंपनी में लाखों की नौकरी करने लगी।GAIL में पूजा ने लगभग 6 साल तक काम किया। कंपनी में वह ऊंचे पद पर थीं, लेकिन वह अपने गांव के लिए कुछ करना चाहती थी जिसके चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
किसानों की ज़िंदगी बदलने का है सपना
पूजा का मानना है कि शहर में न तो अच्छी हवा है, न खाने में स्वाद और न ही साफ़ पानी है, तो फिर इतने पैसे कमाने का क्या फायदा? वह आगे बताती हैं,“ मैंने बहुत से बड़े शहर देखें हैं और कई गांव भी देखे हैं। मुझे हमेशा लगता था कि अगर थोड़ी मेहनत की जाए तो गांवों की ज़िंदगी बदल सकती है। इस सोच के साथ मैंने अपनी नौकरी छोड़ गांव जाने का फैसला किया।“
4 महीने की फार्मिंग ट्रेनिंग भी किया
गांव आने के बाद पूजा खेती के बारे में सीखने लगी इसके लिए वह असम के डिब्रूगढ़ भी गयीं। जहां उन्होंने 4 महीने की ऑर्गनिक फार्मिंग पर ट्रेनिंग की। ट्रेनिंग लेने के बाद पूजा ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर साल 2016 में ‘बैक टू विलेज’ नाम एक स्चार्टप लॉन्च किया। इसके जरिए वह किसानों के साथ मिलकर जैविक खेती पर काम शुरू किया।
5000 किसान जुड़ चुके हैं साथ
अपने इस स्टार्टअप के लिए उन्होंने अपनी सारी कमाई लगा दी। पूजा बताती हैं कि यहाँ पर किसानों को केमिकल फार्मिंग की बजाय जैविक खेती करने के लिए मनाना बहुत ही मुश्किल था।इसलिए हमने तय किया कि हम एक सेंटर तैयार किया। इसमें हमने किसानों को देसी बीज मुहैया करवाया और उन्हें जैविक खाद बनाना सिखाया । शुरूवात में हमारे साथ बहुत ही कम किसान जुड़े थे लेकिन कुछ ही महीनों में कुल 5000 किसानों ने हमारा सेंटर ज्वाईन कर लिया।
किसानों को होगा फायदा
पूजा का कहना है कि हमारे इस मुहिम का उद्देश्य है कि किसान अपने स्वदेशी बीज बनाए, अपनी खाद खुद बनाए साथ ही वह अपने घर-परिवार की ज़रूरत के हिसाब से सब चीज़ें घर में उगायें और फिर ऊपर का जो ज़्यादा बचे उसे बाज़ार में बेचें।इससे किसान की लागत कम होगी और बचत ज़्यादा।
Published on:
18 Nov 2019 04:55 pm
बड़ी खबरें
View Allहॉट ऑन वेब
ट्रेंडिंग
