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Jagannath Rath Yatra 2020: जानिए क्या है ‘जगन्नाथ रथ यात्रा’ का मतलब और कैसे हुई थी इसकी शुरूआत?

सुप्रीम कोर्ट(supreme court) ने पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी है। अब ये तय हो चुका है कि आषाढ शुक्ल द्वितीया यानी 23 जून 2020 को पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा (Jagannath Rath Yatra ) का आयोजन किया जाएगा।

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Vivhav Shukla

Jun 22, 2020

 history of Jagannath Rath Yatra

history of Jagannath Rath Yatra

नई दिल्ली। कोरोना (Coronavirus) के खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने 18 जून को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra 2020) पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इस आदेश को वापस लेने के लिए 21 लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय (supreme court) का दरवाजा खटखटाया था। माना जा रहा था कि इस बार रथयात्रा (Jagannath Rath Yatra ) की परंपरा टूट जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आज सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने कहा कि स्वास्थ्य मुद्दों के साथ बिना समझौता किए और मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ रथ यात्रा आयोजित की जाएगी।

23 जून को होगा रथयात्रा का आयोजन

अब ये तय हो चुका है कि आषाढ शुक्ल द्वितीया यानी 23 जून 2020 को पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा (Jagannath Rath Yatra ) का आयोजन किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। रथयात्रा में सबसे आगे ताल ध्वज पर श्री बलराम, उसके पीछे पद्म ध्वज रथ पर माता सुभद्रा व सुदर्शन चक्र और अंत में गरुण ध्वज पर श्री जगन्नाथ जी सबसे पीछे चलते हैं।

बहन को नगर का भ्रमण करता थे भगवान

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra ) को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं हैं। स्कंद पुराण के अनुसार एक दिन भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने नगर देखने की इच्छा प्रभु जगन्नाथ के सामने प्रकट की और द्वारका के दर्शन कराने की प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान जगन्नाथ ने उनकी इच्छा की पूर्ति के लिए उन्हें रथ में बैठाकर नगर का भ्रमण करवाया। जिसके बाद से यहां हर साल जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती हैं।

लकड़ी के बने होते हैं रथ

इस रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra ) में भगवान जगन्‍नाथ, बहन सुभद्रा और बलरामजी तीनों के रथ अलग-अलग होते हैं। इन तीनों रथों को नगर में भ्रमण करवाया जाता है और फिर ये तीनों अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाते हैं। यहां विभिन्‍न प्रकार के 56 भोग लगाकर तीनों की खातिरदारी की जाती है।

सौ यज्ञ करने के बराबर मिलता है पुण्‍य

जानकारी के लिए बता दें कि यात्रा के तीनों रथ (Jagannath Rath Yatra ) लकड़ी के बने होते हैं जिन्हें श्रद्धालु खींचकर चलते हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ में 16 पहिए लगे होते हैं एवं भाई बलराम के रथ में 14 व बहन सुभद्रा के रथ में 12 पहिए लगे होते हैं।मान्‍यताओं के अनुसार, जो भी व्‍यक्ति इस रथयात्रा में शामिल होकर इस रथ को खींचता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्‍य प्राप्‍त होता है।